कांकरवा-आली: शनि मंदिर विस्तार की राह में गुर्जर समाज ने रखी ऐतिहासिक शर्त, सराय हटाने के बदले मांगा 1 करोड़ नकद और 5 गुना जमीन!
प्रसिद्ध तीर्थ स्थल शनिमहाराज आली (कांकरवा) में मंदिर विस्तार के लिए सराय हटाने के मुद्दे पर गुर्जर समाज ने बड़ा दांव खेला है। कैलाश पहलवान और रूपलाल गुर्जर के नेतृत्व में हुई बैठक में समाज ने मंदिर मंडल से सराय के बदले 1 करोड़ रुपये और 10 हजार वर्ग फीट जमीन की मांग की है। सांवता के गोपाल गुर्जर ने दी जानकारी। इस निर्णय से मंदिर विस्तार योजना में नया मोड़ आ गया है।

कांकरवा: मेवाड़ के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल शनिमहाराज आली में मंदिर विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना एक नए और निर्णायक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। मंदिर के भव्य विस्तार के लिए मुख्य द्वार के समीप स्थित गुर्जर समाज की सराय को हटाने के मुद्दे पर समाज ने अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। शनिवार को गुर्जर समाज 'चारो चोखला' की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज ने मंदिर मंडल के समक्ष एक भारी-भरकम प्रस्ताव रखते हुए स्पष्ट कर दिया कि सराय स्थानांतरण तभी संभव होगा जब उनकी शर्तों को पूरा किया जाएगा। इस गहमागहमी भरे माहौल में समाज ने मंदिर मंडल से सराय के बदले एक करोड़ रुपये नकद और मौजूदा जगह से पांच गुना अधिक भूमि की मांग कर दी है।
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की पटकथा शनिवार को उस समय लिखी गई जब मंदिर विस्तार को लेकर आपसी सहमति बनाने के उद्देश्य से गुर्जर समाज के वरिष्ठ लोगों का जमावड़ा हुआ। यह विशेष बैठक समाज के प्रमुख स्तंभ माने जाने वाले कैलाश पहलवान, रूपलाल गुर्जर और देशराज गुर्जर के आतिथ्य में संपन्न हुई। बैठक का मुख्य एजेंडा मंदिर मंडल के उस प्रस्ताव पर विचार करना था, जिसमें मंदिर के मुख्य द्वार के पास बनी समाज की सराय को अन्यत्र स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था। सांवता निवासी गोपाल गुर्जर ने बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि चूंकि सराय मंदिर के मुख्य द्वार के बिल्कुल समीप है, इसलिए मंदिर के विकास कार्यों में बाधा आ रही थी। मंदिर कमेटी की भावना का सम्मान करते हुए गुर्जर समाज ने भी सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन साथ ही अपने हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा दांव भी चल दिया है।
बैठक में मौजूद समाज के प्रबुद्ध जनों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि वे अपनी पुश्तैनी जगह छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन इसके बदले में मंदिर मंडल को एक करोड़ रुपये की राशि देनी होगी। इतना ही नहीं, समाज ने यह भी शर्त रखी है कि नई सराय के निर्माण के लिए उन्हें वर्तमान सराय के क्षेत्रफल से पांच गुना अधिक, यानी लगभग 10 हजार वर्ग फीट जमीन आवंटित की जाए। इसके अतिरिक्त, नवग्रह मंदिर के सामने लगी स्टील की रेलिंग को हटाने का प्रस्ताव भी पुरजोर तरीके से रखा गया। यह बैठक न केवल मांगों के लिहाज से बल्कि समाज की एकजुटता के लिए भी ऐतिहासिक रही।
इस निर्णय प्रक्रिया में समाज के कई गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विचार-विमर्श में भाग लिया। बैठक में उदयराम पारी, नारायण लाल, राम थली निवासी छगन लाल गुर्जर, खुम राज, एक अन्य नारायण लाल, भूरालाल, सोहन लाल, भंवर लाल और रतन लाल गुर्जर सहित समाज के कई अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति मौजूद रहे। इन सभी ने एक स्वर में मांगों का समर्थन किया और मंदिर मंडल के समक्ष इसे मजबूती से रखने का निर्णय लिया। अब गेंद मंदिर मंडल के पाले में है कि वे आस्था के केंद्र के विस्तार के लिए गुर्जर समाज की इन भारी-भरकम शर्तों पर क्या निर्णय लेते हैं, जिस पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
