चित्तौड़गढ़। श्री कल्लाजी वेदपीठ एवं शोध संस्थान के तत्वावधान में प्रतिवर्ष बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव इस वर्ष भी कल्याणनगरी स्थित श्री कल्लाजी वेदपीठ परिसर में श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में आयोजित किया जा रहा है।

महोत्सव का विवरण एवं कथा क्रम

यह आयोजन माघ शुक्ल बसंत पंचमी से प्रारंभ हुआ। महोत्सव के अंतर्गत कथा वाचक गौनंदन पं. विकास नागदा द्वारा प्रतिदिन दोपहर 12 से सायं 4 बजे तक श्री कल्लाजी मंदिर परिसर में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण वाचन किया जा रहा है।

कथा के विभिन्न दिवसों का घटनाक्रम इस प्रकार रहा:

  • प्रथम दिवस: श्रीमद्भागवत महात्म्य एवं मंगलाचरण का वर्णन।
  • द्वितीय दिवस: कुंती स्तुति एवं कपिल उपाख्यान।
  • तृतीय दिवस: सती चरित्र, जड़भरत कथा एवं ध्रुव चरित्र।
  • चतुर्थ दिवस: श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य और उत्सवमय वर्णन।
  • पंचम दिवस: श्री बालकृष्ण लीला एवं गोवर्धन पूजा के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

षष्ठम दिवस: महारास लीला एवं रुक्मिणी मंगल

षष्ठम दिवस बुधवार को महारास लीला एवं रुक्मिणी मंगल का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। इस अवसर पर कथा वाचक गौनंदन पं. विकास नागदा ने कहा:

"भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रचित महारास उनकी ऐश्वर्य लीला का ही स्वरूप है। यह किसी प्रकार की कामलीला नहीं, बल्कि पूर्णत दिव्य और आध्यात्मिक लीला है। यदि रासलीला काम से संबंधित होती, तो कामदेव को भस्म करने वाले भगवान शिव स्वयं गोपी रूप धारण कर रासलीला में सम्मिलित नहीं होते। दंडकारण्य के ऋषि एवं कर्मकांड तथा ज्ञानकांड के मंत्र ही गोपी रूप में प्रकट होकर भगवान के साथ रास रचाते हैं। यही तथ्य रासलीला को दिव्य और अलौकिक सिद्ध करता है।"

कथा के मुख्य आकर्षण:

  • उद्धव-गोपी संवाद: उद्धव जी गोपियों को भगवान के ब्रह्मस्वरूप का उपदेश देकर उनके विरह शोक का नाश करते हैं।
  • विवाहोत्सव: कथा के विश्राम काल में भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के विवाहोत्सव का मंगलमय गान हुआ।
  • भजन एवं नृत्य: भजनों के दौरान श्रद्धालु “टाटा थैया” करते हुए नृत्य में लीन हो गए।
  • संगीतमय सेवा: प्रहलाद कृष्ण महाराज एवं उनकी टीम द्वारा प्रदान की जा रही है।

ठाकुर श्री कल्लाजी का गिरिराज स्वरूप में मनमोहक श्रृंगार

सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रतिदिन ठाकुर श्री कल्लाजी का प्रभु श्रीकृष्ण स्वरूप में आकर्षक एवं मनोहारी श्रृंगार किये जा रहे है।

  • विशेष श्रृंगार: महोत्सव के षष्ठम दिवस ठाकुर श्री कल्लाजी का विशेष रूप से भगवान गिरिराज जी स्वरूप में अलौकिक श्रृंगार किया गया।
  • प्रभु का स्वरूप: प्रभु श्रीकृष्ण को अपनी तर्जनी अंगुली पर गिरिराज पर्वत धारण किए हुए स्वरूप में सजाया गया।
  • छप्पन भोग: ठाकुर श्री को छप्पन भोग के अंतर्गत नानाविध प्रकार की 56 अनूठी एवं स्वादिष्ट मिष्ठानों का भोग अर्पित किया गया।
  • श्रद्धांजलि: भोग अर्पण के पश्चात श्रद्धालुओं ने प्रभु से सुख, समृद्धि एवं मंगलकामना की प्रार्थना की।

आज होगा महोत्सव का समापन

सप्तम एवं अंतिम दिवस आज परीक्षित मोक्ष एवं फागोत्सव के साथ पूर्णाहुति कर श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का विधिवत समापन किया जाएगा। श्रृंगार दर्शन के दौरान मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर रहा और श्रद्धालु प्रभु श्रीकृष्ण के गिरिराज स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर होते नजर आए।

Pratahkal Bureau

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