चित्तौड़गढ़। न्याय की पहुंच अब केवल अदालतों के गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे आम आदमी की दहलीज तक पहुंचने को बेताब है। चित्तौड़गढ़ के राजकीय विधि महाविद्यालय में मंगलवार को एक ऐसी ही महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता की बयार बही, जिसने कानून की बारीकियों को आम जनमानस के लिए सरल और सुलभ बना दिया। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष मानसिंह चूंडावत के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर की कमान प्राधिकरण सचिव सुनील कुमार गोयल ने संभाली। यह आयोजन केवल एक औपचारिक सभा नहीं, बल्कि समाज के उस अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था, जो अक्सर कानूनी पेचीदगियों के डर से अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ पाता।

सचिव सुनील कुमार गोयल ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण योजना 2010 की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि कानून अमीर-गरीब का भेद नहीं करता। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 12 के तहत समाज के गरीब, वंचित और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करना प्रशासन की प्राथमिकता है। सचिव गोयल ने विस्तार से समझाया कि कैसे प्राधिकरण निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने से लेकर पीड़ित प्रतिकर दिलाने, अपील संस्थित करने और मध्यस्थता के जरिए विवादों का त्वरित निस्तारण करने में सेतु का कार्य कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विवादों के समाधान को न्याय प्रक्रिया की एक क्रांतिकारी पहल बताया।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में पैनल अधिवक्ता भारती गहलोत ने प्राधिकरण द्वारा संचालित राज्यव्यापी अभियानों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने ‘न्याय आपके द्वार’ पहल के माध्यम से लोक उपयोगिता समस्याओं के त्वरित समाधान पर बल दिया। इसके साथ ही, ड्रग अवेयरनेस एंड वेलनेस एवीगेशन, बाल विवाह रोको अभियान, नई चेतना 4.0 राष्ट्रीय अभियान और पर्यावरण संरक्षण हेतु पैन इंडिया विधिक साक्षरता पहल जैसी योजनाओं की जानकारी साझा की गई। जागरूकता का यह सिलसिला 'जागृति' और 'संवाद' के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से मिटाने का संकल्प दोहराता नजर आया। इस गरिमामयी अवसर पर कॉलेज प्राचार्य राजेश खटवानी सहित प्रभात शर्मा, प्रहलाद राय व्यास, के.एस. कंग और संदीप सेठिया जैसे प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की सार्थकता को और बढ़ा दिया। यह शिविर न केवल कानूनी जानकारी का केंद्र बना, बल्कि इसने चित्तौड़गढ़ के नागरिकों में यह विश्वास जगाया कि न्याय अब कठिन नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है।

Pratahkal Newsroom

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