जोयड़ा बावजी में आस्था का सैलाब, आकोला वासियों ने आयोजित किया सामूहिक महाप्रसादी भोज
जोयड़ा बावजी सदियों से पशुपालकों की आस्था का केंद्र है। आकोला में इस वर्ष भी सामूहिक महाप्रसादी और गोठ का आयोजन हुआ।

तस्वीर में जोयड़ा श्याम बावजी मंदिर के प्रांगण में जमीन पर बैठकर भोजन करते ग्रामीण और श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं।
आकोला क्षेत्र के जोयड़ा श्याम बावजी परिसर में समस्त आकोला वासियों, पंच पटेलों और ग्रामीणों की ओर से सामूहिक महाप्रसादी भोज का आयोजन किया गया। जोयड़ा बावजी मंदिर में पूरे गांव से चंदा एकत्रित कर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह आयोजन किया गया।
चित्तौड़गढ़ जिले के भोपालसागर तहसील क्षेत्र की निलोद ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला जोयड़ा बावजी तीर्थ स्थल सदियों से पशुपालकों और श्रद्धालुओं के लिए जन आस्था का केंद्र रहा है। पशुपालक जोयड़ा बावजी को मवेशियों का डॉक्टर मानकर पूजते हैं।
आकोला से दस किलोमीटर दूर और उदयपुर जिले की सरहद से सटा करीब एक हजार की आबादी वाला जोयड़ा जिले का अंतिम गांव है। यहां एक मंदिर है, जिसे जोयड़ा बावजी के नाम से जाना जाता है। यहां आने वाले अधिकांश श्रद्धालु पशुपालक होते हैं, जो बीमार मवेशी के ठीक होने की कामना से बोलमा बोल जाते हैं और मवेशी के ठीक होने पर बोलमा उतारने आते हैं।
राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से श्रद्धालु यहां आते हैं। रामदेवरा जाने वाले जातरू और पदयात्री जोयड़ा बावजी के दर्शन कर ही आगे रवाना होते हैं।
आकोला के समस्त ग्रामवासियों और पंच पटेलों की ओर से हर वर्ष की भांति सामूहिक महाप्रसादी और गोठ का आयोजन भी होता है। पुराने लोग बताते हैं कि यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। कस्बे के अलावा मालियों की भागल, जवाहर नगर, पुर्बिया का खेड़ा, खेडिया, भील बस्ती और गाडरीयावास के लोग भी इसमें भाग लेते हैं।
पुराने लोगों के अनुसार जोयड़ा बावजी आदिकालीन सभ्यता का गांव है। जोयड़ा गांव की उत्पत्ति जोदड़ो से हुई। पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस मंदिर को स्थापित किया। वे मारदड़ी खेलते थे। इसका प्रमाण वह गोल चट्टान है, जो दड़ी है, और लंबी चट्टान है, जो गठी है। ये दोनों मंदिर आज भी मौजूद हैं। इसका उल्लेख महाभारत में भी है।
जोयड़ा गांव जिस टीले पर बसा है, उसके बीच आयडकालीन सभ्यता के अवशेष दबे हैं। जोयड़ा गांव में ही जोयड़ा बावजी का मूल मंदिर है। देवगढ़, कुवारीया, काकरिया आदि गांवों में जोयड़ा बावजी की जोत है। मंदिर द्वापर युग का है तथा सदियों से इसे इसी नाम से जाना जाता रहा है।
जोयड़ा बावजी गौ रक्षक हैं। समय के साथ-साथ मंदिर का स्वरूप बदलता रहा है, लेकिन पशुपालकों और श्रद्धालुओं की आस्था में जोयड़ा बावजी का स्थान आज भी बना हुआ है।

Nandlal Teli, Chittorgarh
प्रातःकाल संवाददाता
परिचय:
नन्दलाल तेली 'प्रातःकाल' न्यूज़ पोर्टल में एक अनुभवी और समर्पित संवाददाता हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 वर्षों का लंबा और गहन अनुभव रखने वाले नन्दलाल जी जमीन से जुड़ी समस्याओं और ग्रामीण भारत की आवाज़ को प्रमुखता से उठाने के लिए जाने जाते हैं।
कवरेज और विशेषज्ञता:
वे मुख्य रूप से चित्तौड़गढ़ जिले के भोपालसागर क्षेत्र की आकोला तहसील से ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उनका मुख्य ध्यान 'शिक्षा' और 'स्वास्थ्य' जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर रहता है, जिन पर वे नियमित रूप से ज्ञानवर्धक और सटीक रिपोर्ट साझा करते हैं। इसके साथ ही, वे गाँव की हर छोटी-बड़ी जन-समस्या को प्रशासन तक पहुँचाने और स्थानीय खबरों को निष्पक्षता से पाठकों के सामने रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
