भूपालसागर, चित्तौड़गढ़।

आस्था, भक्ति और उल्लास से ओतप्रोत वातावरण के बीच भूपालसागर में भगवान श्री करेड़ा पार्श्वनाथ का जन्मकल्याणक महोत्सव भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया गया। प्रातःकाल से ही जैन तीर्थ क्षेत्र में धार्मिक उत्साह चरम पर रहा और संपूर्ण नगर प्रभु भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

महोत्सव का शुभारंभ सवेरे भगवान श्री पार्श्वनाथ की मंगल आरती से हुआ। इसके पश्चात विधिवत श्रंगार कर प्रभु को चांदी के रथ में विराजमान किया गया। आकर्षक रथ में सुसज्जित भगवान के साथ भव्य वरघोड़ा निकाला गया, जो मंदिर परिसर की परिक्रमा करते हुए महाराणा भूपालसिंह बस स्टैंड से मुख्य बाजार तक पहुंचा। बैंड-बाजों की मधुर स्वरलहरियों के बीच “जय प्रभु पार्श्वनाथ” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

वरघोड़े में जैन संतों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। सैकड़ों धर्मावलंबी प्रभु भक्ति में लीन होकर वरघोड़े के साथ चलते रहे। श्रद्धालु नृत्य, भजन और जयकारों के माध्यम से अपनी आस्था प्रकट करते नजर आए। नगर के प्रमुख मार्गों पर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे वातावरण पूर्णतः धार्मिक और उत्सवमय बन गया।

वरघोड़ा आजाद चौक स्थित चारभुजा मंदिर होते हुए भूपालसागर तालाब पहुंचा, जहां भगवान की विशेष आरती की गई। इसके पश्चात वरघोड़ा पुनः मंदिर परिसर लौटा, जहां विधिवत समापन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और परंपरा का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

भगवान श्री करेड़ा पार्श्वनाथ का जन्मकल्याणक महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त रूप से रेखांकित करता नजर आया। इस आयोजन ने भूपालसागर को एक बार फिर धार्मिक चेतना और सामूहिक श्रद्धा के केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित किया।

Pratahkal Bureau

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