उपनगरीय क्षेत्र सेन्थी में चातुर्मास प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। प्रवचन में साध्वी श्री प्रेरणा श्री जी म.सा. ने जीनवाणी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे जीवन परिवर्तन और सफलता का आधार बताया।

साध्वी श्री प्रेरणा श्री जी म.सा. ने कहा कि जीनवाणी रूपी वर्षा से ही जीवन सफल होता है। जीवन में परिवर्तन के लिए जीनवाणी की जरूरत है। जीनवाणी के माध्यम से खोया हुआ मन जाग जाता है और इससे सदाचार अंकुरित होता है। अतः जीनवाणी को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि उसे आचरण में भी लाना चाहिए।

जैन सिद्धान्ताचार्य प्रतिभा श्री जी ने स्वार्थपरायणता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तन और मन को स्वस्थ रखकर तथा निज स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज एवं राष्ट्र सेवा में अपना योगदान देना है। तन को स्वस्थ रखने के लिए तपना पड़ता है। इन्द्रियों को वश में करने के लिए इन्द्रियों का दमन करना पड़ता है।

साध्वी श्री प्रेक्षा श्री जी एवं साध्वी श्री दीक्षिता श्री जी ने भी अपने प्रवचनों से शांतिभवन में उपस्थित सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं को धर्मलाभ प्रदान किया।

प्रवचन में स्थानीय क्षेत्र के साथ आसपास के कई गांवों से भी संघ के श्रावक-श्राविकाएं पहुंचे। श्री संघ सेन्थी की ओर से उनका अभिनन्दन किया गया। चातुर्मास प्रवचन में जीनवाणी को जीवन में उतारने और सदाचार को आचरण का हिस्सा बनाने का संदेश प्रमुखता से दिया गया।

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