स्थानीय नाथकंवर स्मृति संस्थान में जैन संत पूज्य अम्बालाल महाराज की 121वीं जन्म जयंती श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में समग्र जैन समाज की सहभागिता रही तथा आध्यात्मिक वातावरण में गुरुभक्ति और धर्म साधना का संदेश गूंजता रहा।

कार्यक्रम को महासतीवृन्द शांता कुंवर जी आदि ठाना-3 का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्री ने कहा कि वर्तमान समय में संसार चारों ओर से अंधकारमय परिस्थितियों से घिरा हुआ प्रतीत होता है, जहां व्यक्ति स्वयं को अकेला महसूस करता है। ऐसे समय में धर्म ही वह आधार है, जो मनुष्य को उसकी वास्तविक मंजिल तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि गुरुभक्ति के माध्यम से कर्मों की निर्जरा संभव है और यही आत्मकल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है।

प्रवचन के दौरान साध्वी श्री ने पूज्य अम्बालाल महाराज के जीवन, दर्शन और उनके आध्यात्मिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से नवकार मंत्र का जाप किया तथा एकासन व्रत का संकल्प लिया। धार्मिक आयोजन में नैतिक हिंगड़, सलोनी सेठिया एवं हनिशा हिंगड़ ने भावपूर्ण कविता पाठ कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जन्म जयंती समारोह के अवसर पर पारसमल चतरसिंह सहलोत परिवार द्वारा गौतम प्रसादी का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के समापन पर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष लादूलाल हिंगड़ ने उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया तथा गुरु गुणगान स्वरूप एक गीतिका प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

धार्मिक श्रद्धा, गुरु भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन से ओतप्रोत यह आयोजन जैन समाज के लिए प्रेरणादायी बन गया, जहां संत अम्बालाल महाराज के आदर्शों और शिक्षाओं को स्मरण करते हुए समाज ने धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

Pratahkal Bureau

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