शिक्षा की गुणवत्ता को नए आयाम देने और प्राथमिक स्तर पर शिक्षण पद्धतियों को अधिक जीवंत बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को भूपालसागर में एक महत्वपूर्ण बौद्धिक समागम का आयोजन हुआ। शिक्षा विभाग एवं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय 'डेमोंस्ट्रेशन सेमिनार' ने क्षेत्र के शैक्षणिक परिदृश्य में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। इस विशेष कार्यशाला में ब्लॉक के विभिन्न विद्यालयों से आए कक्षा 1 से 5 तक हिंदी एवं पर्यावरण विषय पढ़ाने वाले लगभग 70 शिक्षकों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।

सेमिनार का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहाँ शिक्षण-अधिगम की जटिलताओं को सरल बनाने के लिए तीन मुख्य सत्रों की रूपरेखा तैयार की गई थी। प्रथम सत्र 'खिलखिलाती कविताएँ' के नाम रहा, जिसमें कविता शिक्षण की नवीन विधियों का जीवंत प्रदर्शन किया गया। इस सत्र का मुख्य केंद्र बिंदु बच्चों की सहभागिता को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करना था। इसके पश्चात 'कहानी की जादूगरी' सत्र ने शिक्षकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान प्राथमिक स्तर पर कहानी के माध्यम से भाषा विकास और भाषाई समझ को प्रगाढ़ करने की रणनीतियों पर गहन चर्चा हुई। शिक्षकों ने न केवल अपनी विशेषज्ञता साझा की, बल्कि कहानी शिक्षण का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर यह दिखाया कि कैसे एक शिक्षक अपनी कक्षा में जादुई माहौल सृजित कर सकता है।

तृतीय सत्र 'रीडिंग कल्चर' विद्यालयी वातावरण में पढ़ने की आदत को एक संस्कार के रूप में विकसित करने पर केंद्रित रहा। यहाँ शिक्षकों ने अपनी कक्षाओं के वीडियो साझा कर अपने व्यक्तिगत नवाचारों को प्रस्तुत किया, जो अन्य साथियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। दोपहर के सत्र में एबीएल (Activity Based Learning) किट के प्रभावी उपयोग पर विशेष उन्मुखीकरण किया गया, ताकि शिक्षक खेल-खेल में शिक्षा की अवधारणा को धरातल पर उतार सकें। आर्ट एंड क्राफ्ट गतिविधियों ने शिक्षकों के भीतर छिपे कलाकार को मंच प्रदान किया, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस पूरे शैक्षणिक विमर्श का सफल संचालन एवं नेतृत्व ब्लॉक के आठ अनुभवी एंकर शिक्षकों द्वारा किया गया। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाते हुए भूपालसागर ब्लॉक कार्यालय से मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) रमेश मीणा, एसबीईओ लक्ष्मण सिंह चुंडावत एवं आरपी ओमप्रकाश ने सेमिनार का सूक्ष्म अवलोकन किया। अधिकारियों ने फैसिलिटेटर समूह और प्रतिभागी शिक्षकों के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की। सीबीईओ रमेश मीणा ने कहा कि इस प्रकार के नवाचार न केवल शिक्षकों का कौशल बढ़ाते हैं, बल्कि सरकारी स्कूलों के प्रति जनसामान्य के विश्वास को भी सुदृढ़ करते हैं। यह सेमिनार न केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम था, बल्कि भविष्य की उन्नत और आनंदमयी शिक्षा की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुआ है।

Pratahkal Bureau

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