इणा मीणा बावजी देवस्थान: 300 साल पुराना मंदिर, गुम वस्तु मिलने की मान्यता
चिकारड़ा के 300 साल पुराने इणा मीणा बावजी देवस्थान पर तेल चढ़ाने और खोई वस्तु मिलने की है अनोखी मान्यता, दीपावली पर होते हैं विशेष आयोजन।

चिकारड़ा के देवस्थान पर स्थित इणा मीणा बावजी की प्रतिमा, जहां खोई वस्तु मिलने की मान्यता है।
चिकारड़ा कस्बे की देवगली में स्थित करीब 300 वर्ष पुराना इणा मीणा बावजी का देवस्थान अपनी अनूठी लोककथा, गुम हुई वस्तु मिलने की मान्यता और तेल के कुएं को लेकर विशेष पहचान रखता है। महज 5 बाय 5 फीट के मंदिरनुमा स्थान में स्थापित इस देवस्थान से जुड़ी मान्यताएं मुंबई, दिल्ली और मेवाड़ के विभिन्न शहरों व गांवों तक फैली हुई हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर में सिर स्थापित है, जबकि देवगली के बाहर शंकरलाल कोठारी की दीवार में धड़ स्थापित है। दीपावली पर यहां पांच दिवसीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, जिनमें गरबा, छप्पन भोग और कवि सम्मेलन प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
गवरी मंचन के दौरान हुए संघर्ष से जुड़ी है लोककथा
देवगली निवासी और वर्तमान में मुंबई में रहने वाले बुजुर्ग भगवतीलाल कोठारी ने अपने पूर्वजों से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि पुराने समय में गुर्जर मोहल्ले स्थित मंदिर में गवरी का मंचन हो रहा था। इसमें भील समुदाय का एक व्यक्ति बंजारे की भूमिका निभा रहा था। इसी दौरान दूसरे गांव से आए मीणा समुदाय के कुछ लोगों के साथ पात्र को लेकर विवाद हो गया। कहासुनी बढ़ने के बाद विवाद संघर्ष में बदल गया।
लोककथा के अनुसार, इस दौरान हटिया नामक पात्र निभा रहे व्यक्ति ने बाहर से आए मीणा का सिर धड़ से अलग कर दिया। सिर लुढ़कता हुआ बाजार के एक कोने तक पहुंच गया, जबकि धड़ देवगली के बाहर स्थित दीवार तक जा पहुंचा। मान्यता के अनुसार, आज भी मंदिर में सिर की स्थापना है और धड़ देवगली के बाहर शंकरलाल कोठारी की दीवार में स्थापित है।
कच्चे स्थान से पक्के देवस्थान तक पहुंचा मंदिर
भगवतीलाल कोठारी के अनुसार, शुरुआत में सिर के आसपास ग्रामीणों ने एक छोटा-सा कच्चा स्थान बनाया था। समय के साथ इसमें सुधार हुआ और यह पक्के देवस्थान के रूप में विकसित हो गया। श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और मनोकामनाएं पूरी होने के विश्वास के चलते ग्रामीणों ने भी इसके विकास में सहयोग दिया। वर्तमान में मंदिर में टाइलें लगी हैं और कांच की सुंदर कलाकारी इसकी शोभा बढ़ाती है। भक्तों के सहयोग से हुए विकास कार्यों ने छोटे से देवस्थान को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया है।
रुई का फुम्बा चढ़ाने से खोई वस्तु मिलने की मान्यता
इणा मीणा बावजी के देवस्थान पर गुम हुई वस्तु मिलने की मान्यता विशेष रूप से प्रचलित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, किसी व्यक्ति की वस्तु खो जाने या कहीं रखकर भूल जाने पर वह तेल में भीगा हुआ रुई का फुम्बा चढ़ाकर मनौती मांगता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ऐसा करने से खोई हुई वस्तु मिल जाती है।
मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार तेल अर्पित करते हैं। कोई एक-दो लीटर, तो कोई पांच लीटर या पूरा तेल का पीपा चढ़ाता है। पूजा-अर्चना के दौरान धूप-अगरबत्ती भी की जाती है।
मंदिर परिसर में बना 6 से 8 फीट गहरा तेल का कुआं भी यहां का विशेष आकर्षण है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, करीब चार-पांच वर्ष पहले कुआं भरने की स्थिति में पहुंचने पर इसमें से 23 डिब्बे तेल निकाला गया था। इसके बाद से भी कुएं में निरंतर तेल की आवक बनी रहने की बात बताई जाती है।
मुंबई, दिल्ली और मेवाड़ तक फैली श्रद्धालुओं की आस्था
इस देवस्थान के प्रति लोगों की आस्था केवल चिकारड़ा तक सीमित नहीं है। मुंबई, दिल्ली, इंदौर, रतलाम, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कानोड़, भींडर, मंगलवाड़ और डूंगला सहित कई छोटे-बड़े शहरों व गांवों से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां मनोकामना लेकर पूजा करने और उसके पूरी होने पर दोबारा दर्शन करने की परंपरा प्रचलित है।
देवगली को लेकर भी स्थानीय मान्यता है कि यहां कभी ताले नहीं लगाए जाते और चोरी की घटना नहीं हुई है। ग्रामीण इसे इणा मीणा बावजी के प्रति अपनी आस्था और विश्वास से जोड़कर देखते हैं।
दो दशक से दीपावली पर पांच दिवसीय आयोजन की परंपरा
श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था के साथ देवस्थान पर दीपावली के अवसर पर पांच दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की परंपरा विकसित हुई। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब दो दशक से यहां इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। तेरस से बीज तक मंदिर और देवगली को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। पांचों दिन गरबा होता है, जबकि अंतिम दिन छप्पन भोग का आयोजन किया जाता है। समय-समय पर धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के साथ कवि सम्मेलन भी आयोजित किए जाते हैं।
देवस्थान के विकास और आयोजनों की व्यवस्थाओं के लिए कमेटी गठित है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, मंदिर के भंडार से वर्षभर में करीब 50 से 70 हजार रुपये की नकद राशि निकलती है। इस राशि और श्रद्धालुओं के सहयोग से विकास कार्य तथा धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाएं की जाती हैं।
6 से 10 नवंबर तक होंगे पांच दिवसीय आयोजन
कमेटी के कार्यकारिणी अध्यक्ष शुभम बोहरा ने बताया कि इस वर्ष 6 से 10 नवंबर तक पांच दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए मंदिर की सजावट, देवगली में रोशनी, गरबा और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन के अंतिम दिन छप्पन भोग लगाया जाएगा। इसके साथ ही रात्रि में ख्याति प्राप्त कवियों का कवि सम्मेलन भी होगा।
भगवतीलाल कोठारी, चिकारड़ा ने बताया, “यह मंदिर करीब 300 वर्ष पुराना है। मान्यता के अनुसार, दूर-दूर से लोग अपनी खोई हुई वस्तु मिलने की मनोकामना लेकर यहां आते हैं और रुई का फुम्बा चढ़ाते हैं। ग्रामीणों में यह विश्वास भी है कि इणा मीणा बावजी की आस्था के चलते देवगली में आज तक चोर चोरी नहीं कर पाए हैं।”
सुभाष अग्रवाल, चिकारड़ा ने बताया, “मंदिर के भंडार से वर्षभर में करीब 50 से 70 हजार रुपये की नकद राशि निकलती है। वहीं, तेल के कुएं में तेल की आवक भी लगातार बनी रहने की बात कही जाती है। भंडार से प्राप्त राशि का उपयोग देवस्थान के विकास और व्यवस्थाओं पर किया जाता है।”
करीब 300 वर्ष पुराना बताया जाने वाला इणा मीणा बावजी का देवस्थान चिकारड़ा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। लोककथा, खोई हुई वस्तु मिलने की मान्यता, तेल के कुएं से जुड़ी चर्चा, श्रद्धालुओं का सहयोग और दीपावली पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम इस स्थान की विशिष्ट पहचान हैं। पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के बीच यह छोटा-सा देवस्थान स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

Praveen Mehta, Dungla
नाम: प्रवीण मेहता
वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातकाल)
कार्यक्षेत्र: डूंगला उपखंड, जिला चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): प्रशासन, शिक्षा, और राजनीति
परिचय
प्रवीण मेहता राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले डूंगला उपखंड क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा व्यवस्था, स्थानीय राजनीति, घटना-दुर्घटना और जनहित से जुड़े कार्यों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाना, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इन योजनाओं से जोड़ना और सामाजिक सरोकार के मुद्दों को निष्पक्षता से उठाना है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
प्रवीण मेहता को प्रिंट और डिजिटल मीडिया में दो दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:
- जय राजस्थान, मेवाड़ी मीरा, और जननायक: वर्ष 2002 में इन समाचार पत्रों में कार्य किया।
- दैनिक दशपुर एक्सप्रेस: वर्ष 2006 से लगातार 12 वर्षों तक इस समाचार पत्र में अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक भास्कर: वर्ष 2008 से 2012 तक संवाददाता और एजेंसी के रूप में कार्य किया।
- प्रातकाल: वर्ष 2018 से वर्तमान तक लगातार 'प्रातकाल' समाचार पत्र के संवाददाता के रूप में डूंगला क्षेत्र में कार्यरत हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 10वीं कक्षा तक पूरी की है।
