हिंदुस्तान जिंक की 6 इकाइयों को मिला भामाशाह शिक्षा विभूषण सम्मान
राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए हिंदुस्तान जिंक को लगातार 11वीं बार भामाशाह सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया।

जयपुर में आयोजित 30वें भामाशाह सम्मान समारोह के दौरान राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर (बाएं से दूसरे) हिंदुस्तान जिंक की प्रतिनिधि को शिक्षा विभूषण का प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए।
राजस्थान में शिक्षा की अलख जगाने और ग्रामीण अंचलों में शैक्षिक क्रांति लाने की दिशा में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के अभूतपूर्व प्रयासों को एक बार फिर प्रदेश स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित प्रतिष्ठित 30वें भामाशाह सम्मान समारोह में हिंदुस्तान जिंक की छह प्रमुख इकाइयों को शिक्षा विभूषण से नवाजा गया। यह लगातार 11वां वर्ष है जब राजस्थान सरकार ने कंपनी की परिवर्तनकारी शैक्षिक पहलों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति उसके समर्पण को सराहा है। समारोह में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की गरिमामयी उपस्थिति ने इस उपलब्धि को और भी विशेष बना दिया।
इस भव्य आयोजन में हिंदुस्तान जिंक की रामपुरा आगुचा माइन, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर, जावर माइन्स, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स, जिंक स्मेल्टर देबारी और कायड माइन को शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान के लिए शिक्षा विभूषण से सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और अतिरिक्त शिक्षा सचिव राजेश यादव ने राज्यभर से चयनित 145 भामाशाहों और 99 प्रेरकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर विभिन्न विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने कंपनी के प्रतिनिधियों को यह गौरवपूर्ण सम्मान सौंपा।
हिंदुस्तान जिंक के लिए यह सम्मान महज एक पदक नहीं, बल्कि उस नौ वर्षीय निरंतर संघर्ष और निवेश का प्रमाण है, जिसके तहत कंपनी ने शिक्षा के क्षेत्र में 551 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि व्यय की है। इस राशि में से 83 करोड़ रुपये का निवेश आधारभूत संरचना के उन्नयन, जैसे कि कक्षा-कक्षों के निर्माण, स्वच्छ पेयजल सुविधाओं, शौचालय, खेल के मैदानों और विद्युतीकरण पर किया गया है। शेष 468 करोड़ रुपये का उपयोग दीर्घकालिक शैक्षिक प्रयासों में किया गया है, जिनमें नंद घर के माध्यम से प्रारंभिक बचपन की देखभाल, शिक्षा संबल, जीवन तरंग, ऊंची उड़ान और ग्रामीण बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
इन व्यापक प्रयासों का प्रभाव धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कंपनी के शिक्षा कार्यक्रमों से प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल नामांकन और सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आंकड़ों की मानें तो राजस्थान में कक्षा 10वीं का उत्तीर्ण प्रतिशत जो 2007 में मात्र 47 प्रतिशत था, वह 2026 में बढ़कर 92.53 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विशेष रूप से, शिक्षा संबल कार्यक्रम से जुड़े 37 स्कूलों ने शत-प्रतिशत परिणाम हासिल कर एक कीर्तिमान स्थापित किया है।
अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूती देते हुए, हिंदुस्तान जिंक ने राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग के साथ एक नए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में शैक्षिक विकास के लिए 36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया जाएगा। शिक्षा के अतिरिक्त, कंपनी स्वास्थ्य सेवा, जल संरक्षण, स्वच्छता और स्थायी आजीविका जैसे क्षेत्रों में भी निरंतर सक्रिय है। इन सामूहिक प्रयासों ने राजस्थान के 4 हजार से अधिक गांवों में 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन को नई दिशा दी है, जो कंपनी के सामाजिक सरोकारों के प्रति उसके अटूट संकल्प को दर्शाता है।

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