हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में उच्च घनत्व वाले वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र के विकास के लिए आईसीएफआरई-अरिड फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एएफआरआई), जोधपुर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। तीन वर्ष की यह साझेदारी हिंदुस्तान जिंक के ‘नो नेट लॉस ऑफ बायोडायवर्सिटी’ के लक्ष्य को सहयोग देगी।

एएफआरआई भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत देश का प्रमुख वानिकी अनुसंधान संस्थान है। यह एमओयू एएफआरआई जोधपुर में आयोजित समारोह में हुआ, जिसमें दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और परियोजना टीम के सदस्य मौजूद रहे।

समझौते के तहत चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स परिसर में वैज्ञानिक तरीके से उच्च घनत्व वाले वृक्षारोपण किए जाएंगे। परियोजना में एएफआरआई हिंदुस्तान जिंक का तकनीकी और ज्ञान साझेदार होगा। संस्थान वृक्षारोपण की योजना, उपयुक्त प्रजातियों के चयन, मिट्टी एवं जल अध्ययन, निगरानी तथा हरित क्षेत्र के दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

इस पहल का उद्देश्य स्थानीय प्रजातियों पर आधारित, जलवायु के अनुकूल और जंगल जैसी पारिस्थितिकी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत किया जा सके।

समारोह में हिंदुस्तान जिंक की ओर से एसबीयू डायरेक्टर, चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स आलोक रंजन, हेड-एनवायरनमेंट मनीषा भाटी तथा पी. मनोजकुमार उपस्थित रहे। वहीं एएफआरआई की ओर से डॉ. ए.के. त्रिपाठी, निदेशक, एएफआरआई, भावना शर्मा, वैज्ञानिक-ई एवं प्रमुख, फॉरेस्ट इकोलॉजी एंड क्लाइमेट चेंज डिवीजन, डॉ. तरुण कांत, वैज्ञानिक-जी, डॉ. संगीता सिंह, वैज्ञानिक-एफ और शरद कोठारी, वैज्ञानिक-बी एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक सहित अन्य वैज्ञानिक और विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।

इस अवसर पर आलोक रंजन ने कहा कि हिंदुस्तान जिंक इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन का एक आदर्श मॉडल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि यह उनकी सततता और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डॉ. ए.के. त्रिपाठी ने कहा कि अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग से जैव विविधता संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार को नई गति मिलेगी। वैज्ञानिक ज्ञान के प्रभावी उपयोग से पर्यावरण संरक्षण के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी तथा जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन और सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस तीन वर्षीय साझेदारी के माध्यम से चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में स्थानीय प्रजातियों, वैज्ञानिक अध्ययन और दीर्घकालिक प्रबंधन पर आधारित हरित क्षेत्र विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा, जिससे जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के प्रयासों को गति मिलेगी।

Piyush Mundara, Chittorgarh

Piyush Mundara, Chittorgarh

नाम: पियूष मूंदड़ा

वर्तमान पद: संवाददाता

कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

अनुभव: साल 2013 से

विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग

बीट और कवरेज 

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शैक्षणिक योग्यता

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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