चित्तौड़गढ़ गौरव तीर्थ प्रन्यास के तत्वावधान में आयोजित 'हल्दीघाटी विजयोत्सव' का भव्य आयोजन चित्तौड़गढ़ में अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। मेवाड़ की शौर्य गाथा को जीवंत करते हुए इस कार्यक्रम में न केवल इतिहास के पन्नों को पलटा गया, बल्कि युवा पीढ़ी में मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव भी भरा गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'मेवाड़ गौरवगाथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता' के विजेताओं को पुरस्कृत करना रहा, जिसने आयोजन को एक प्रेरणादायक स्वरूप प्रदान किया।

मुख्य अतिथि के रूप में पधारे राजवीर सिंह चलकोई ने दीप प्रज्ज्वलन और महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सेव अवर फाउंडेशन के अध्यक्ष अरिहंत सिंह चरड़ास, ब्रिगेडियर हर्षवर्धन सिंह, जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष नारायण सिंह, आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश चंद्र, संत गोपाल भैया और लोकश सेठिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन पुष्कर नराणिया ने दिया, जबकि आभार प्रदर्शन श्याम सिंह हाड़ा ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रवण सिंह राव द्वारा किया गया।

इस गौरवशाली उत्सव के मुख्य आकर्षण प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के परिणाम रहे। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले सीडलिंग मॉडर्न पब्लिक स्कूल, उदयपुर के छात्र सूर्य शर्मा को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान पर रहे पीएमश्री गवर्नमेंट स्कूल, कारडा के छात्र भारत सिंह को 51 हजार रुपये और तृतीय स्थान पर रही छात्रा खुशी यादव को 21 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, प्रन्यास ट्रस्टी वीरेंद्र सिंह के सौजन्य से प्रतिभागियों और कलाकारों को महाराणा प्रताप के 600 चित्र भेंट किए गए।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास को मंच पर साकार किया गया। पंखुड़ी बिट्स, विशाल एकेडमी, वंडर प्ले स्कूल और मेवाड़ महोत्सव के कलाकारों ने हाड़ी रानी का जौहर, चंदन का बलिदान, मीरा की भक्ति और जौहर जैसी लघु नाटिकाओं का मंचन किया। संतोष मल्होत्रा द्वारा प्रस्तुत वंदेमातरम गीत ने दर्शकों में देशभक्ति का संचार किया। साथ ही, 'मेवाड़ गौरव गाथा' पुस्तिका के संपादन से जुड़े डॉ. गोपाल जाट, वीरेंद्र सिंह और अभिषेक श्रीमाल का सम्मान किया गया।

मुख्य अतिथि राजवीर सिंह चलकोई ने अपने संबोधन में महाराणा प्रताप के जीवन को मातृभूमि की रक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात महाराणा प्रताप द्वारा अब्दुल रहीम खान-ए-खाना के परिवार की महिलाओं को दिए गए सम्मान और सुरक्षा का उल्लेख करते हुए उनके संस्कारों को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि चेतक की वीरता और प्रताप का संघर्ष आज भी लोगों को चित्तौड़गढ़ और हल्दीघाटी की ओर खींच लाता है। कार्यक्रम के दौरान चित्तौड़गढ़ गौरव तीर्थ प्रन्यास द्वारा भविष्य की व्यापक कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई, जिसमें दुर्ग का जीर्णोद्धार, महाराणा प्रताप की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा की स्थापना, शोध संस्थान का विकास और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार जैसे महत्वाकांक्षी प्रस्ताव शामिल थे। यह आयोजन मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ।

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