चित्तौड़गढ़। भारत के औद्योगिक परिदृश्य में कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में एक युगांतरकारी अध्याय की शुरुआत हुई है। विश्व की अग्रणी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड और विशिष्ट रसायनों की विख्यात निर्माता, सिलॉक्स इंडिया ने अपनी दशकों पुरानी साझेदारी को एक नए और आधुनिक आयाम पर पहुँचा दिया है। इस रणनीतिक गठबंधन के केंद्र में हिन्दुस्तान जिंक का क्रांतिकारी लो-कार्बन जिंक ब्रांड 'इकोजे़न' है, जिसे अब सिलॉक्स इंडिया अपने विनिर्माण कार्यों में मुख्य घटक के रूप में शामिल करेगा। यह कदम न केवल दोनों कंपनियों के पर्यावरणीय लक्ष्यों को पुख्ता करता है, बल्कि भारतीय औद्योगिक मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) में डीकार्बनाइजेशन की प्रक्रिया को भी नई गति प्रदान करता है।

इस सहयोग की महत्ता इस तथ्य में निहित है कि यह प्रदर्शित करता है कि कैसे एक 'अपस्ट्रीम' निर्माता अपने नवाचारों के माध्यम से 'डाउनस्ट्रीम' उद्योगों को हरित भविष्य की ओर ले जा सकता है। इकोजे़न को अपने उत्पादन चक्र में एकीकृत करके सिलॉक्स इंडिया न केवल अपने जिंक-आधारित रासायनिक उत्पादों के कार्बन फुटप्रिंट को न्यूनतम करने में सफल होगा, बल्कि अपने वैश्विक ग्राहकों की उच्च गुणवत्ता और प्रदर्शन की कसौटियों पर भी खरा उतरेगा। उल्लेखनीय है कि इकोजे़न एशिया का ऐसा पहला लो-कार्बन जिंक है जिसे शत-प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग से निर्मित किया गया है। इसका प्रमाणित कार्बन उत्सर्जन प्रति टन जिंक पर एक टन से भी कम है, जो वैश्विक औद्योगिक औसत की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत कम है।

वेदांता समूह की इकाई हिन्दुस्तान जिंक वर्तमान में बुनियादी ढांचे, ऑटोमोटिव और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आवश्यक सामग्री की आपूर्ति कर रही है। कंपनी की सस्टेनेबिलिटी रणनीति अब केवल अपनी चारदीवारी के भीतर उत्सर्जन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने ग्राहकों के 'स्कोप 3' उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने में भी एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी है। इकोजे़न की यह विशेषता इसे विशिष्ट बनाती है कि यह पूर्ण 'ट्रेसेबिलिटी' और थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन के साथ आता है, जिससे ग्राहकों के लिए अपने कच्चे माल के पर्यावरणीय प्रभाव का पारदर्शी लेखा-जोखा रखना संभव हो गया है। उदाहरण स्वरूप, गैल्वनाइजिंग जैसे कार्यों में इकोजे़न का उपयोग करने से प्रति टन स्टील पर लगभग 400 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन को रोका जा सकता है।

साझेदारी की इस उपलब्धि पर हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पूर्णकालिक निदेशक अरुण मिश्रा ने स्पष्ट किया कि कंपनी के लिए डीकार्बनाइजेशन एक समग्र दृष्टिकोण है। उनके अनुसार, इकोजे़न इस बात का प्रमाण है कि कैसे जिंक स्वच्छ विनिर्माण का आधार बन सकता है। वहीं, सिलॉक्स इंडिया के प्रबंध निदेशक प्रकाश रमन ने इस गठबंधन को अपने दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी रोडमैप के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि इकोजे़न के माध्यम से वे अपने पोर्टफोलियो में एम्बेडेड उत्सर्जन को कम करते हुए उच्च-प्रदर्शन वाले समाधान प्रदान करना जारी रखेंगे।

अंततः, यह साझेदारी केवल दो व्यावसायिक संस्थाओं का मिलन नहीं है, बल्कि यह भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को अधिक टिकाऊ और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। जैसे-जैसे वैश्विक बाजार लो-कार्बन सामग्रियों की मांग बढ़ा रहे हैं, हिन्दुस्तान जिंक और सिलॉक्स इंडिया का यह साझा प्रयास अन्य उद्योगों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा। यह सहयोग सिद्ध करता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन न केवल संभव है, बल्कि भविष्य की औद्योगिक सफलता के लिए अपरिहार्य भी है।

Pratahkal Newsroom

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