आकोलागढ़ में रामकथा का भव्य समापन: "दंड के साथ दया भी है आवश्यक", पूजा मेनारिया ने श्रीराम के आदर्शों से किया जनमानस को मंत्रमुग्ध
चिकारड़ा के आकोलागढ़ में 10 दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य समापन हुआ, जहाँ सुश्री पूजा मेनारिया ने श्रीराम के न्याय और दया के सिद्धांतों की व्याख्या की। रावण उद्धार और भव्य राज्याभिषेक के प्रसंगों के साथ निकली विशाल शोभायात्रा में हजारों ग्रामीणों का हुजूम उमड़ा। धर्म और मर्यादा के इस संगम की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

चिकारड़ा/आकोलागढ़। धर्म, मर्यादा और न्याय की प्रतिमूर्ति प्रभु श्रीराम के आदर्शों की गूंज से आकोलागढ़ की धरा राममय हो उठी। क्षेत्र में आयोजित 10 दिवसीय भव्य श्रीराम कथा का समापन आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिन व्यास पीठ पर विराजमान सुश्री पूजा मेनारिया ने श्रोताओं को जीवन दर्शन का सार समझाते हुए कहा कि शास्त्रों के अनुसार शासन में दंड के साथ दया का समन्वय अनिवार्य है, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने रावण का उद्धार कर प्रस्तुत किया।
कथा के समापन सत्र में सुश्री पूजा मेनारिया ने लंका विजय के प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि श्रीराम ने न केवल अधर्म का विनाश किया, बल्कि शत्रु के प्रति भी अगाध मर्यादा का परिचय दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीराम ने रावण के दुर्गुणों का अंत किया, किंतु उसके विद्वान होने के गुणों को स्वीकार करते हुए उसे मोक्ष प्रदान किया। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि न्याय केवल दंड देने में नहीं, बल्कि कल्याण की भावना रखने में निहित है। इससे पूर्व कथा में वानर राज बाली के उद्धार का प्रसंग भी सुनाया गया, जिसमें धर्म मार्ग से भटके बाली को प्रभु ने सत्य का बोध कराया। वहीं, रामदूत हनुमान द्वारा माता जानकी की खोज, मुद्रिका समर्पण और लंका दहन के वृत्तांत ने पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं में भक्ति का संचार कर दिया।
कथा के अंतिम पड़ाव पर भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या आगमन और भव्य राज्याभिषेक का प्रसंग जीवंत हो उठा। समूचा आकोलागढ़ क्षेत्र दीपों की आभा और जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो गया। समापन के अवसर पर एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। फूलों की वर्षा और भजनों की धुन पर थिरकते श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक उत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। आयोजकों के अनुसार, पिछले 10 दिनों से चिकारड़ा सहित आसपास के दर्जनों गांवों से आए हजारों ग्रामीणों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि इसने समाज को मर्यादा और सद्भाव के मार्ग पर चलने की नई प्रेरणा दी।

Praveen Mehta, Dungla
नाम: प्रवीण मेहता
वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातकाल)
कार्यक्षेत्र: डूंगला उपखंड, जिला चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): प्रशासन, शिक्षा, और राजनीति
परिचय
प्रवीण मेहता राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले डूंगला उपखंड क्षेत्र के संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा व्यवस्था, स्थानीय राजनीति, घटना-दुर्घटना और जनहित से जुड़े कार्यों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाना, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इन योजनाओं से जोड़ना और सामाजिक सरोकार के मुद्दों को निष्पक्षता से उठाना है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
प्रवीण मेहता को प्रिंट और डिजिटल मीडिया में दो दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:
- जय राजस्थान, मेवाड़ी मीरा, और जननायक: वर्ष 2002 में इन समाचार पत्रों में कार्य किया।
- दैनिक दशपुर एक्सप्रेस: वर्ष 2006 से लगातार 12 वर्षों तक इस समाचार पत्र में अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक भास्कर: वर्ष 2008 से 2012 तक संवाददाता और एजेंसी के रूप में कार्य किया।
- प्रातकाल: वर्ष 2018 से वर्तमान तक लगातार 'प्रातकाल' समाचार पत्र के संवाददाता के रूप में डूंगला क्षेत्र में कार्यरत हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा 10वीं कक्षा तक पूरी की है।
