डूंगला। अरावली की पहाड़ियों में आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माने जाने वाले एलवा माताजी मंदिर में अमावस्या के पावन अवसर पर मासिक भंडार खोले जाने पर भक्तिभाव से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दृश्य सामने आया। शुक्रवार को मंदिर कमेटी के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी सदस्यों की उपस्थिति में विधिवत भंडार खोला गया, जिसमें एक लाख सात हजार 175 रुपये की नगदी के साथ एक सोने की नथनी प्राप्त हुई।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, भंडार खोलने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और परंपरागत विधि से संपन्न की गई। नगदी की गणना और प्राप्त आभूषण को विधिवत रजिस्टर में दर्ज किया गया। यह राशि और आभूषण श्रद्धालुओं द्वारा माता के चरणों में अर्पित किए गए चढ़ावे का प्रतीक हैं, जो क्षेत्र में माता एलवा के प्रति गहरी आस्था को दर्शाते हैं।

अरावली की पहाड़ियों पर स्थित एलवा माताजी का यह प्राचीन मंदिर क्षेत्रवासियों के लिए वर्षों से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां दूर-दराज के गांवों और कस्बों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर माता के दरबार में शीश नवाते हैं और मुराद पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाने के साथ रात्रि जागरण कर प्रसाद का भोग लगाते हैं, जिसे परिवार और बंधु-बांधवों के साथ ग्रहण किया जाता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति से मांगी गई मनोकामनाएं माता एलवा अवश्य पूर्ण करती हैं, यही कारण है कि यहां भक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। भंडार में प्राप्त राशि और स्वर्णाभूषण इस विश्वास और आस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण माने जा रहे हैं।

इस अवसर पर मंदिर मंडल अध्यक्ष नारायण लाल व्यास, कोषाध्यक्ष दुर्गा शंकर शर्मा सहित मंदिर मंडल के सदस्य, यात्रीगण एवं मंदिर पुजारी उपस्थित रहे। मासिक भंडार खुलने की यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी सुदृढ़ करती है।

Pratahkal Bureau

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