डूंगला: भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से ही होगा राष्ट्र का सर्वांगीण उत्थान, शिक्षक संघ के शिविर में गूंजा 'पंच परिवर्तन' का संकल्प
डूंगला में राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ, जिसमें 'पंच परिवर्तन' और भारतीय सांस्कृतिक विचारधारा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का संकल्प लिया गया। जानिए कैसे शिक्षक 'मैकाले पद्धति' को त्यागकर आचार्य परंपरा से भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं और संघ के शताब्दी वर्ष के क्या हैं मुख्य लक्ष्य।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) की जिला शाखा चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में डूंगला के बाणोडा बालाजी, बेगूं में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवादी विचारधारा और शैक्षिक सुधारों के अनूठे संगम के साथ संपन्न हुआ। 03 जनवरी की शाम से शुरू होकर 5 जनवरी तक चले इस गहन वैचारिक मंथन में वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारतीय सांस्कृतिक रीति-नीति और 'स्व' का विचार ही संगठन की वास्तविक विचारधारा है। इस आयोजन का मुख्य केंद्र बिंदु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपने शताब्दी वर्ष में लिया गया 'पंच परिवर्तन' का संकल्प रहा, जिसके माध्यम से समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाने का आह्वान किया गया।
प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां प्रथम सत्र में जिला सभाध्यक्ष तेजपाल सिंह शक्तावत ने विस्तृत परिचय और व्यवस्था की जानकारी देकर आधारशिला रखी। सत्र को गति देते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांत महामंत्री जगजीतेंद्र सिंह ने वैचारिक अधिष्ठान की दृढ़ता पर बल दिया। उन्होंने मैकाले की शिक्षा पद्धति से उपजी विसंगतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि राष्ट्रवादी समाज के निर्माण की महती जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है। इसी क्रम में संगठन के संभाग उपाध्यक्ष एवं अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (भीलवाड़ा) कैलाश चंद्र सुथार ने संगठन की कार्य पद्धति को स्पष्ट करते हुए रेखांकित किया कि यहाँ 'परिवार भाव' सर्वोपरि है और भारत का मूल विचार ही संगठन की आत्मा है।
बौद्धिक विमर्श की इस श्रृंखला में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के विभाग मंत्री रामप्रसाद मानम्या ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय चिंतन की महत्ता बताई, जबकि धर्म जागरण समन्वय के प्रांत संयोजक महिपाल सिंह राठौड़ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 'पंच परिवर्तन' संकल्प की विस्तृत व्याख्या की। राठौड़ ने कहा कि संघ जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व-जागरण और नागरिक शिष्टाचार के माध्यम से राष्ट्र का कायाकल्प करना चाहता है। प्रशिक्षण के दौरान जिला अध्यक्ष पूरण मल लौहार ने श्रेणीवार बैठकों में शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किया और संगठन की सक्रियता पर प्रकाश डाला।
शिक्षण जगत में 'शिक्षक से आचार्य' बनने की यात्रा पर बल देते हुए प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में मार्मिक पाथेय दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को नशा मुक्त भारत और आदर्श व्यक्तित्व निर्माण का संवाहक बनना होगा। वहीं, प्रदेश प्रकोष्ठ सदस्य प्रकाश चंद्र बक्शी ने 'हमारा विद्यालय-हमारा तीर्थ' की संकल्पना को साकार करने हेतु प्रभावी प्रार्थना सभा और प्रेरक प्रसंगों जैसे नवाचारों को आवश्यक बताया।
शिविर का समापन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कार्यवाह दिनेश भट्ट के ओजस्वी संबोधन के साथ हुआ। भट्ट ने शिक्षकों को 'आचरण का आदर्श' बताते हुए कहा कि विद्यालय केवल भवन नहीं, बल्कि वे शक्ति केंद्र हैं जहाँ चरित्रवान नागरिकों का निर्माण होता है। इस गरिमामयी आयोजन में जिला संगठन मंत्री नर्बदा शंकर पुष्करणा, मधु जैन, उपाध्यक्ष हमीर सिंह राजपूत, शंकर लाल भांभी, सचिव भंवर सिंह गौड़, महिला मंत्री दीपिका झाला, कोषाध्यक्ष सागर मल पटवा और सदस्य सुशील कुमार लड्डा, विकास आचार्य, आशीष कुमार गुप्ता, मांगी लाल सुथार सहित विभिन्न उपशाखाओं के पदाधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कुल 55 अपेक्षित कार्यकर्ताओं ने इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से राष्ट्र सेवा और संगठन विस्तार का संकल्प लेकर प्रस्थान किया।

Pratahkal Bureau
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