50 साल बाद भी विकास से अछूता पदमपुरा, जर्जर सड़क, जलभराव और झुके बिजली पोल बने खतरा
डूंगला के पदमपुरा गांव में जर्जर सड़क, विद्यालय के बाहर जलभराव और झुके बिजली पोलों से ग्रामीण परेशान। मंत्री को भेजे प्रस्ताव के बाद कार्रवाई की उम्मीद।

तस्वीर में डूंगला क्षेत्र के पदमपुरा गांव की एक जर्जर सड़क और राजकीय विद्यालय के मुख्य द्वार के सामने जलभराव व कीचड़ दिखाई दे रहा है।
डूंगला क्षेत्र की पालोद ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला पदमपुरा गांव आजादी के 50 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। गांव के लोग वर्षों से विकास की राह देख रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। गांव की सबसे बड़ी समस्या पदमपुरा से मोरवन को जोड़ने वाले लगभग तीन किलोमीटर लंबे मार्ग की है, जिसकी स्थिति पिछले कई वर्षों से अत्यंत खराब बनी हुई है। बरसात के मौसम में सड़क पर कीचड़, गड्ढों और जलभराव के कारण ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण कुलदीप लोहार ने बताया कि पिछले लगभग एक दशक से गांव में कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग केवल पदमपुरा ही नहीं, बल्कि मिर्चाखेड़ी, छिपाखेड़ा, गल्लाखेड़ा, दौलतपुरा, बक्शीखेड़ा और पालोद सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों की जीवनरेखा है। ग्रामीण रोजगार, कृषि उपज की ढुलाई, दैनिक जरूरतों की खरीदारी, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए मोरवन होकर मंगलवाड़ और निंबाहेड़ा तक इसी मार्ग का उपयोग करते हैं, लेकिन सड़क की जर्जर स्थिति के कारण प्रतिदिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीण नाथूलाल और सोहनलाल ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए प्रतिदिन मोरवन आते-जाते हैं। विशेष रूप से छात्राओं को साइकिल से विद्यालय पहुंचने में भारी परेशानी होती है। बरसात के दौरान सड़क पर फैली कीचड़ के कारण कई बार वे गिरकर चोटिल भी हो जाती हैं। वहीं किसानों को कृषि उपज मंडी तक पहुंचाने और ग्रामीणों को दैनिक उपयोग का सामान लाने में भी लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
गांव की समस्या केवल जर्जर सड़क तक सीमित नहीं है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, पदमपुरा के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर लंबे समय से जलभराव बना हुआ है। छोटे-छोटे विद्यार्थियों को प्रतिदिन गंदे पानी और कीचड़ से होकर विद्यालय में प्रवेश करना पड़ता है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए प्रधानाध्यापिका ललिता के नेतृत्व में विद्यालय प्रशासन और स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठक में सत्र 2026-27 के प्रस्ताव संख्या-03 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में विद्यालय के मुख्य द्वार के सामने जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की गई है। प्रस्ताव की प्रति सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन मंत्री गौतम कुमार दक को भी भेजी गई है, ताकि शीघ्र आवश्यक कार्रवाई हो सके।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार बरसात के दौरान जलभराव के कारण विद्यार्थियों के विद्यालय में प्रवेश और निकास में भारी कठिनाई होती है। कई बार बच्चों को जूते-चप्पल हाथ में लेकर पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटना और संक्रमण का खतरा बना रहता है। एसएमसी सदस्य हीरालाल, नारायणलाल, भेरूलाल और माधुलाल ने बताया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है तथा इसके समाधान के लिए कई बार संबंधित विभागों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीण मुकेश कुमार, भंवरलाल, रामलाल और महेंद्र कुमार ने बताया कि सड़क किनारे लगे कई बिजली के पोल झुक चुके हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा सड़क के दोनों ओर उगी झाड़ियां इतनी घनी हो चुकी हैं कि सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते। बरसात के मौसम में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है।
रामेश्वर लाल और शंभूलाल ने बताया कि इस संबंध में कई बार ग्राम पंचायत, प्रशासनिक अधिकारियों तथा ग्रामीण सेवा शिविरों में शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि जब हर गांव के समान विकास की बात की जाती है तो पदमपुरा आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित क्यों है।
ग्रामीणों ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से मांग की है कि पदमपुरा-मोरवन मार्ग का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए, विद्यालय के सामने स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था की जाए, झुके हुए बिजली पोलों को बदला जाए तथा सड़क किनारे फैली झाड़ियों की सफाई कर मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग पूरे क्षेत्र की शिक्षा, कृषि, रोजगार और दैनिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो बरसात के मौसम में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि मंत्री को भेजे गए प्रस्ताव के बाद प्रशासन इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर वर्षों से चली आ रही परेशानियों का स्थायी समाधान करेगा।

Pratahkal Bureau
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