चित्तौड़गढ़। शहर और जिले के विभिन्न इलाकों में डॉग बाइट्स की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे आमजन में भय और चिंता का माहौल बन गया है। जिला चिकित्सालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 दिनों में 129 लोग डॉग बाइट्स के शिकार हुए हैं। प्रतिदिन औसतन पांच से छह मरीज ऐसे ही हमलों के चलते चिकित्सालय पहुंच रहे हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।

शहर की गलियों और मोहल्लों में रहने वाले कुत्तों के झुंड अक्सर छोटे बच्चों को निशाना बना रहे हैं। वहीं, दुपहिया वाहन और साइकिल सवारों के पीछे दौड़ते हुए उन्हें संतुलन खोने और दुर्घटनाग्रस्त होने पर मजबूर कर रहे हैं। इस कारण दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हुई है और आमजन के लिए सड़कें असुरक्षित बन गई हैं।

हालांकि समस्या पर अंकुश लगाने की दिशा में प्रशासन की पहल न के बराबर रही है। नगर परिषद ने अब तक आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई टेंडर जारी नहीं किया है और शहर में ऐसे कुत्तों के लिए कोई शेल्टर होम भी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि शहर में लगभग साढ़े चार हजार कुत्ते हैं। वर्ष 2022 में कुत्तों की संख्या नियंत्रण में लाने के लिए 3030 पशुओं की नसबंदी की गई थी, लेकिन मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि यह प्रयास पर्याप्त नहीं साबित हुआ।

जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह न केवल स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाता है, बल्कि प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल खड़ा करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात नगरीय इलाकों से भिन्न नहीं हैं और वहां भी लोग सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यदि तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और बढ़ सकती है। आवारा कुत्तों के कारण होने वाले हमले और सड़क दुर्घटनाएं न केवल जनसुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा की स्थिति को भी जन्म देती हैं।

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Pratahkal Bureau

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