चित्तौड़गढ़। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में सांसद सीपी जोशी को ज्ञापन सौंपकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया टीईटी संबंधी निर्णय पर पुनर्विचार और केंद्र सरकार से विधायी हस्तक्षेप की माँग की। संगठन का कहना है कि यह फैसला देशभर के लाखों शिक्षकों के भविष्य को सीधे प्रभावित कर रहा है और इसे भविष्य लक्षी रूप से लागू किया जाना आवश्यक है।

ज्ञापन सौंपते समय पुष्करणा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के ताज़ा निर्णय के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए, उनकी नियुक्ति तिथि चाहे जो भी हो, शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्देश उन शिक्षकों पर भी लागू होगा जिन्हें वर्ष 2010 से पहले शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के तहत विधिक रूप से पात्रता प्राप्त थी। संघ का कहना है कि नए निर्णय में 2010 से पूर्व और 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के मध्य स्थापित विधिक अंतर को नज़रअंदाज़ किया गया है, जिसके कारण देशभर में लगभग 20 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, पदोन्नति और आजीविका पर खतरा पैदा हो गया है।

प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों पूरण मल लौहार, कैलाश चंद्र मालू और तेजपाल सिंह शक्तावत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक उन शिक्षकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी है, जिन्होंने वर्षों तक समर्पण के साथ शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया है। शिक्षक संघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को भविष्य लक्षी रूप से लागू करवाते हुए लाखों शिक्षकों को राहत प्रदान करे।

ज्ञापन सौंपने के दौरान भंवर सिंह गौड़, चावंड सिंह चुंडावत, गोपाल लाल व्यास, जोगेंद्र सिंह, देवकीनंदन वैष्णव, सुषमा पुरोहित, रिधू कविया, नरेश दत्त व्यास और ओमप्रकाश चिमनानी सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। प्रतिनिधि मंडल ने उम्मीद जताई कि सरकार समय रहते इस संवेदनशील मामले को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी, जिससे शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और चिंता समाप्त हो सकेगी।

Pratahkal Bureau

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