पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (डीडीयू) रेलवे स्टेशन से निकलने वाले कचरे को रेलवे की आवासीय कॉलोनी के क्षेत्र में भारी मात्रा में डंप किए जाने का मामला सामने आया है। आवासीय क्षेत्र में कूड़े का ढेर जमा होने से आसपास रहने वाले रेलकर्मियों और उनके परिवारों को दुर्गंध, मच्छर-मक्खियों और संक्रमण के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दौरान कचरे से निकलने वाले गंदे पानी और नालियों के जाम होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे स्टेशनों से निकलने वाले ठोस कचरे के निस्तारण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। NGT के 18 मार्च 2015 के आदेश का हवाला देते हुए CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे प्लेटफॉर्म से निकलने वाले Municipal Solid Waste को निर्धारित निस्तारण स्थल तक पहुंचाया जाना चाहिए और अन्य स्थानों पर डंप नहीं किया जाना चाहिए।

ऐसे में सवाल उठता है कि डीडीयू स्टेशन से निकलने वाला कचरा रेलवे की आवासीय कॉलोनी में किस व्यवस्था के तहत डंप किया जा रहा है? क्या जिस स्थान पर कचरा जमा किया जा रहा है, वह रेलवे द्वारा अधिकृत कचरा प्रसंस्करण या निस्तारण स्थल है? यदि यह अधिकृत स्थल नहीं है तो आवासीय क्षेत्र में कचरा डंप करने की अनुमति किस स्तर से दी गई?

आवासीय क्षेत्र में लगातार कचरा जमा होने से रेलकर्मियों और उनके परिवारों के सामने स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी खतरे की स्थिति बनी हुई है। वहीं, बरसात के दौरान कचरे से निकलने वाला गंदा पानी और नालियों के जाम होने की आशंका इस समस्या को और गंभीर बना सकती है।

NGT के 18 मार्च 2015 के आदेश और CAG की रिपोर्ट में बताए गए कचरा निस्तारण संबंधी प्रावधानों के बीच डीडीयू स्टेशन के कचरे को आवासीय कॉलोनी क्षेत्र में डंप किए जाने का मामला स्वच्छता व्यवस्था और कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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