चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर क्षेत्र में उस समय राजनीतिक पारा गरमा गया जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) में केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार द्वारा किए गए बदलावों के खिलाफ कांग्रेस ने बिगुल फूंक दिया। गुरुवार को क्षेत्र के विभिन्न गांवों में 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत आयोजित विरोध प्रदर्शन और जनजागरण अभियान ने एक जन आंदोलन का रूप ले लिया। कांग्रेस नेताओं ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि गरीबों के पेट पर लात मारने वाली किसी भी नीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह लड़ाई अब गांव की गलियों से निकलकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी।

अभियान के दौरान कांग्रेस पदाधिकारियों के जत्थे ने बबराना, सांवता, भूपालनगर, टांडा और पारी सहित दर्जनों गांवों का सघन दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करते हुए नेताओं ने नए कानूनों की विसंगतियों को उजागर किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया ने जनसभाओं को संबोधित करते हुए तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह तानाशाही रवैया अपना चुकी है और विपक्ष की आवाज को दबाकर मनमाने कानून थोप रही है। सिसोदिया ने सत्ता के अहंकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब यह शर्त थोपना कि राज्य के पास बजट होने पर ही मनरेगा का लाभ मिलेगा, सीधे तौर पर गरीब और मजदूर के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार गरीबों के हक के संसाधन जुटाने से क्यों कतरा रही है।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव डॉ. ललित बोरीवाल ने इस बदलाव को एक गहरे षड्यंत्र का हिस्सा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसे मजबूत कानून को कमजोर कर ग्रामीण मजदूरों को सस्ते श्रमिक के रूप में पूंजीपतियों के हवाले करने की तैयारी की जा रही है। बोरीवाल ने स्पष्ट किया कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण पलायन को रोकना और सम्मानजनक रोजगार देना था, लेकिन भाजपा की नीतियां इसके ठीक विपरीत हैं। इस विरोध प्रदर्शन में कपासन नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन प्रमोद मोदी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष दिनेश चाष्टा, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष मोहन लाल जाट, अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के संभाग प्रभारी दयाल सालवी, पंचायत बूल के सरपंच सोहन गुर्जर, ग्राम पंचायत पारी के सरपंच अम्बा लाल गुर्जर और पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद गुर्जर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में कांग्रेस नेताओं ने एकजुट होकर हुंकार भरी कि यदि इस जनकल्याणकारी कानून के साथ की जा रही छेड़छाड़ तुरंत बंद नहीं की गई, तो संगठन जिला और प्रदेश स्तर पर निर्णायक आंदोलन छेड़ेगा। आंदोलन की इस गूंज ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में मनरेगा का मुद्दा राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

Pratahkal Bureau

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