चित्तौड़गढ़ जिला चिकित्सालय में कलेक्टर का 'धमाका': रविवार की छुट्टी के बीच व्यवस्थाओं का लिया जायजा
चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को खंगाला। ट्रॉमा और फीमेल वार्ड सहित दवा वितरण केंद्र के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने साफ-सफाई में सुधार और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। पीएमओ डॉ. दिनेश वैष्णव और तहसीलदार की मौजूदगी में हुए इस औचक दौरे से अस्पताल प्रशासन में मचा हड़कंप।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने रविवार को जिला चिकित्सालय का अचानक रुख कर सबको चौंका दिया। जब शहर रविवार के अवकाश का आनंद ले रहा था, तब प्रशासन का मुखिया अस्पताल की गलियों में व्यवस्थाओं की बारीकियों को परख रहा था। कलेक्टर के इस औचक निरीक्षण ने न केवल अस्पताल प्रशासन में खलबली मचा दी, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि जनसेवा और स्वास्थ्य सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण की शुरुआत जिला कलेक्टर ने अस्पताल के मुख्य काउंटरों से की, जहाँ उन्होंने पंजीयन और अन्य प्रक्रियाओं को करीब से देखा। इसके बाद वे सीधे ट्रॉमा वार्ड, फीमेल सर्जिकल वार्ड और कोरोना वार्ड की ओर बढ़े। वार्डों में भर्ती मरीजों के बीच पहुँचकर उन्होंने न केवल उनका हाल जाना, बल्कि चिकित्सालय की सेवाओं की जमीनी हकीकत भी जांची। दवा वितरण केंद्र के अवलोकन के दौरान उन्होंने दवाओं की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया का सूक्ष्म निरीक्षण किया। हालांकि कलेक्टर ने अस्पताल की वर्तमान साफ-सफाई पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन उन्होंने कड़े लहजे में सुधार की गुंजाइश भी जताई। उन्होंने मौके पर मौजूद सुपरवाइजर को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वच्छता के मानकों में कोई समझौता न हो और इसे और अधिक बेहतर बनाया जाए।
प्रशासनिक अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर आलोक रंजन ने वार्डवार ड्यूटी रजिस्टर को व्यवस्थित रूप से संधारित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक कहा कि कर्मचारियों की उपस्थिति केवल कागजों तक सीमित न रहकर फील्ड में दिखनी चाहिए और मरीजों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना सुनिश्चित हो। इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के साथ तहसीलदार विपिन चौधरी और पीएमओ डॉ. दिनेश वैष्णव सहित अस्पताल के अन्य वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कलेक्टर का यह कदम जिले की स्वास्थ्य प्रणाली को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है, जो आने वाले समय में चित्तौड़गढ़ की चिकित्सा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है।

Pratahkal Bureau
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