चिकारड़ा में शीतलहर और कोहरे का तांडव: शून्य विजिबिलिटी के बीच टकराईं कारें, ठिठुरन ने थामी रफ्तार
चिकारड़ा में शुक्रवार को शीतलहर और घने कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। 20 मीटर की विजिबिलिटी के कारण सांवलिया जी मार्ग पर दो कारें आपस में भिड़ गईं, जबकि फसलों पर बर्फ की परत जमने से किसान चिंतित हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी। जानिए चिकारड़ा के मौसम का पूरा हाल और दुर्घटना का विवरण।

चिकारड़ा। मरुधरा के मौसम में आए अचानक बदलाव ने जनजीवन को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। चिकारड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह से जारी मौसमी उतार-चढ़ाव के बीच शुक्रवार का दिन इस सीजन का सबसे कष्टदायक दिन साबित हुआ। कड़ाके की शीतलहर और घने कोहरे की दोहरी मार ने न केवल यातायात की रफ्तार थाम दी, बल्कि आमजन को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया। कोहरे की सघनता का आलम यह था कि सुबह के समय दृश्यता (विजिबिलिटी) महज 20 मीटर तक सिमट गई, जिसके चलते सड़कों पर धुआं सा गुबार नजर आया और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
शुक्रवार को मौसम का मिजाज गुरुवार रात से ही बिगड़ने लगा था। रात करीब 8:30 बजे से शुरू हुए कोहरे ने धीरे-धीरे पूरे इलाके को अपनी आगोश में ले लिया। अल सुबह शीतलहर के साथ कोहरे ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह 10:00 बजे तक स्थिति बेहद गंभीर रही और दोपहर 2:00 बजे के बाद ही सूर्य देव के दर्शन हो सके। हालांकि, दोपहर में खिली धूप भी ग्रामीणों को हाड़ कंपा देने वाली सर्दी से राहत दिलाने में नाकाम रही। शाम 4:00 बजे के बाद एक बार फिर बर्फीली हवाओं ने दस्तक दी, जिसके बाद लोग गर्म कपड़ों में लिपटे और अलाव का सहारा लेते नजर आए।
इस घने कोहरे ने सड़क सुरक्षा के दावों की भी पोल खोल दी। चिकारड़ा से सांवलिया जी मार्ग पर विजिबिलिटी शून्य होने के कारण मध्य प्रदेश नंबर की दो कारें आपस में जोरदार तरीके से टकरा गईं। इस भीषण भिड़ंत में दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, हालांकि गनीमत यह रही कि दोनों वाहनों के चालक सुरक्षित रहे और कोई जनहानि नहीं हुई। सड़क पर बिखरे वाहनों के मलबे ने मौसम की भयावहता को साफ बयां किया। केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि खेतों में भी कुदरत का कहर देखने को मिला, जहां फसलों पर बर्फ की सफेद चादर जम गई और पेड़ों से पानी की बूंदें टपकने लगीं।
मौसम के इस तीखे तेवर का सीधा असर जनस्वास्थ्य पर भी पड़ा है। सर्दी, जुकाम, बुखार और टॉन्सिल जैसी बीमारियों ने ग्रामीणों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे सरकारी और निजी अस्पतालों सहित मेडिकल स्टोर्स पर मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी है। इंसान ही नहीं, बेजुबान पशु-पक्षी भी इस सर्दी से अछूते नहीं रहे। किसानों ने अपने पशुओं को बचाने के लिए उन्हें कपड़ों से ढकने और सुरक्षित छायादार स्थानों पर बांधने के जतन किए। शिशिर ऋतु के इस अप्रत्याशित स्वरूप ने पूरे क्षेत्र में चिंता और ठिठुरन का माहौल पैदा कर दिया है।

Pratahkal Bureau
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