चित्तौड़गढ़ में स्वच्छता का 'शंखनाद': खुले में कचरा फेंका तो अब खैर नहीं, नगर परिषद ने वसूला भारी जुर्माना
चित्तौड़गढ़ नगर परिषद ने स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत खुले में कचरा डालने वालों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ते हुए 20 हजार रुपये का चालान वसूला। प्रशासक रामचंद्र खटीक और आयुक्त के निर्देश पर पावटा चौक और सुभाष चौक में हुई इस कार्रवाई में जीपीएस फोटो के आधार पर जुर्माना किया गया। जानिए कैसे प्रशासन अब तकनीकी और सख्ती के जरिए शहर को चमकाने में जुटा है।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी चित्तौड़गढ़ को स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में शीर्ष पायदान पर लाने के लिए नगर परिषद ने अब "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपना ली है। शहर की गलियों और बाजारों को गंदगी मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने न केवल कमर कस ली है, बल्कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ एक बड़ा ‘स्ट्राइक’ अभियान भी शुरू कर दिया है। गुरुवार को शहर के मुख्य बाजारों में उस समय हड़कंप मच गया जब नगर परिषद की टीम साक्ष्यों के साथ सड़कों पर उतरी और गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ मौके पर ही सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया।
स्वच्छता अभियान को नई धार देते हुए नगर परिषद के मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक और जमादार की टीम ने शहर के व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्रों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने तकनीकी का सहारा लेते हुए दुकानदारों द्वारा खुले में कचरा डालने के प्रमाण के तौर पर जीपीएस युक्त फोटो खींचे। इन पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर प्रशासक रामचंद्र खटीक एवं आयुक्त के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत एक विशेष प्रवर्तन अभियान छेड़ा गया। इस टीम में सहायक अभियंता सतीश, मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक सूरज घावरी, जमादार आशीष लोट, रतन कोदली, सोनू राठौड़ एवं अतिक्रमण दस्ते के जवान शामिल रहे।
कार्रवाई की आंच पावटा चौक से लेकर गोल प्याऊ और सुभाष चौक तक पहुंची। जैसे ही टीम ने मौके पर गंदगी की पुष्टि की, वैसे ही नगर निकाय के नियमों के तहत तत्काल कार्रवाई की गाज गिरी। प्रशासन ने कड़ा संदेश देते हुए उल्लंघनकर्ताओं से कुल 20 हजार रुपये का चालान मौके पर ही वसूल किया। इस औचक कार्रवाई ने उन दुकानदारों और प्रतिष्ठानों को साफ चेतावनी दे दी है जो नियमों को ताक पर रखकर सड़कों को डंपिंग यार्ड बना रहे थे।
जुर्माने की कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता का मोर्चा भी संभाला गया। प्रशासक रामचंद्र खटीक और आयुक्त के मार्गदर्शन में अधिकारियों ने दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और फल-सब्जी विक्रेताओं को स्वच्छता की 'एबीसीडी' समझाई। टीम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गीले कचरे के लिए केवल हरे और सूखे कचरे के लिए नीले डस्टबिन का ही उपयोग किया जाए। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह त्यागने और उसके स्थान पर जूट व कपड़े के थैलों जैसे विकल्पों को अपनाने की पुरजोर अपील की गई। नगर परिषद की इस सख्ती और सक्रियता ने स्पष्ट कर दिया है कि चित्तौड़गढ़ को स्वच्छ बनाने की राह में अब कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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