चित्तौड़गढ़: युवक की मौत पर भड़का आक्रोश, प्रशासन के साथ मैराथन वार्ता और कड़ी शर्तों के बाद हुआ अंतिम संस्कार
चित्तौड़गढ़ के कन्नौज गांव में दुर्गेश रैगर की मौत के बाद उपजा तनाव प्रशासन की समझाइश और कड़ी शर्तों पर सहमति के बाद शांत हुआ। पांच दिन पहले शकील और उसके साथियों द्वारा की गई मारपीट में घायल युवक ने उदयपुर में दम तोड़ दिया था, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने भारी प्रदर्शन किया। पूरी रिपोर्ट में जानें कैसे अधिकारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों की वार्ता के बाद हुआ अंतिम संस्कार।

चित्तौड़गढ़। जिले के भदेसर थाना अंतर्गत कन्नौज गांव में बीते दो दिनों से व्याप्त तनावपूर्ण माहौल शुक्रवार को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई लंबी समझाइश के बाद शांत हुआ। पांच दिन पूर्व हुई एक मामूली कहासुनी ने जब हिंसक रूप लिया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि इसका अंत एक युवक की मौत और पूरे गांव में भारी पुलिस जाप्ते की तैनाती के साथ होगा। मृतक दुर्गेश रैगर के परिजनों और ग्रामीणों की मांगों पर सहमति बनने के बाद आखिरकार शुक्रवार को गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
घटनाक्रम की शुरुआत पांच दिन पहले कन्नौज के नई आबादी मंगरी क्षेत्र में हुई थी, जहां दुर्गेश रैगर के परिवार में आपसी विवाद चल रहा था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले शकील की मां बीच-बचाव करने पहुंचीं, लेकिन इस धक्का-मुक्की में उन्हें मामूली चोट आ गई। इस बात से आक्रोशित होकर शकील अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा और दुर्गेश पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल दुर्गेश को प्राथमिक उपचार के बाद उदयपुर रेफर किया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए गुरुवार दोपहर उसने दम तोड़ दिया। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची, क्षेत्र में सांप्रदायिक और सामाजिक सौहार्द पर संकट के बादल मंडराने लगे और ग्रामीण आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी व अन्य मांगों को लेकर पुराने पटवार भवन के पास धरने पर बैठ गए।
शुक्रवार सुबह होते-होते आक्रोश और बढ़ गया। ग्रामीणों ने गांव में जुलूस निकालकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और अपनी मांगों पर अड़ गए। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। माहौल को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरिता सिंह, उपखण्ड अधिकारी रजनी मीणा, तहसीलदार शिव सिंह, उपाधीक्षक विनोद व शिव प्रकाश टेलर, थाना प्रभारी विनोद मेनारिया और धर्मराज मीणा सहित आला अधिकारी मोर्चा संभाले रहे। प्रशासन के सामने ग्रामीणों और रैगर समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी कड़ी शर्तें रखीं।
इस दौरान चली लंबी समझौता वार्ता में विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी मुकेश नाहटा, अनिल चतुर्वेदी, धर्मेश भारती, आशाराम गाडरी सहित समाज के अन्य प्रबुद्धजनों ने सक्रिय भूमिका निभाई। अधिकारियों ने परिजनों को आश्वस्त किया कि मामले में निष्पक्ष जांच होगी और आरोपियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उचित मांगों पर लिखित सहमति बनने के बाद परिजनों ने शव स्वीकार किया। दोपहर बाद कड़ी सुरक्षा के बीच मृतक का अंतिम संस्कार किया गया। यह घटना न केवल एक परिवार के उजड़ने की त्रासदी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि छोटी सी आपसी रंजिश किस तरह एक हंसते-खेलते गांव की शांति भंग कर सकती है। वर्तमान में गांव में शांति है, लेकिन एहतियात के तौर पर पुलिस प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
