चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की वीर धरा पर खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह और युवाओं के अटूट समर्पण का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब सांसद खेल महोत्सव के तहत अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले पहलवानों का भव्य स्वागत किया गया। चित्तौड़गढ़ के गांधीनगर स्थित बागलेश्वर महादेव के सानिध्य में संचालित बालाजी प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित इस सम्मान समारोह ने न केवल विजेता खिलाड़ियों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुँचाया, बल्कि क्षेत्र में कुश्ती की समृद्ध परंपरा को भी नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान संस्थान का प्रांगण अखाड़े के रणबांकुरों के जयघोष से गुंजायमान रहा।

बसंतीलाल पंचोली द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महाराज विनोदचन्द्र यति और संस्थान संरक्षक विष्णु शर्मा उपस्थित रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की महत्ता को और बढ़ा दिया। समारोह की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष कैलाश आगाल ने की। इस अवसर पर समाज और खेल जगत की प्रतिष्ठित विभूतियों ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की, जिनमें संस्थापक सचिव कमलेश गुर्जर, भूपेन्द्रसिंह पंवार, योगेश पारासर, छोटू माली, अजय रजक, मनोहर लौहार, खेमराज गुर्जर, राजकुमार गांछा, किशन गुर्जर सेंती, रमेश जड़िया, दशरथ सनाढ्य, शिव सोनी और राजकुमार गांछा जैसे नाम शामिल रहे। सभी अतिथियों ने एक स्वर में खिलाड़ियों के परिश्रम की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित किया।

सांसद खेल महोत्सव के अखाड़े में अपनी तकनीक और शारीरिक सौष्ठव का प्रदर्शन करने वाले पहलवानों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता के विभिन्न भार वर्गों में अपनी ताकत का परिचय देते हुए 45 किग्रा वर्ग में वीर गुर्जर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि 55 किग्रा वर्ग में रणवीरसिंह राठौड़ ने रजत पदक जीतकर संस्थान का नाम रोशन किया। इसी प्रकार 65 किग्रा वर्ग में देवेन्द्र सिंह राठौड़ तृतीय रहे। वहीं, जीत के शिखर पर पहुँचते हुए 70 किग्रा वर्ग में राहुल गुर्जर, 75 किग्रा वर्ग में रामनिवास गुर्जर और 85 किग्रा भार वर्ग में हिमांशु भांड ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी बादशाहत कायम की। खिलाड़ियों की इस स्वर्णिम सफलता के पीछे पर्दे के पीछे मेहनत करने वाले कुश्ती प्रशिक्षक विजय गांछा और जगपालसिंह राणावत का भी संस्थान द्वारा विशेष अभिनंदन किया गया।

इस उल्लासपूर्ण वातावरण में पहलवान मनन शर्मा, अभयसिंह चौहान, देवीसिंह, किशन पुरी और हरीश की उपस्थिति ने खेल भावना को और प्रगाढ़ किया। यह आयोजन केवल एक सम्मान समारोह मात्र नहीं था, बल्कि यह चित्तौड़गढ़ के उन युवाओं के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा जो सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय पटल पर चमकने का सपना देखते हैं। इस सम्मान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले, तो मेवाड़ी माटी के ये लाल कुश्ती के वैश्विक मंच पर भी तिरंगा लहराने का माद्दा रखते हैं।

Pratahkal Bureau

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