विश्व गौरैया दिवस: चित्तौड़गढ़ में पक्षी आवास और परिंडों का वितरण
संघ की पर्यावरण गतिविधि और एकल अभियान द्वारा रामद्वारा परिसर में गोष्ठी आयोजित, संत दिग्विजय राम और कार्यकर्ताओं ने लगाए पक्षियों के लिए परिंडे।

चित्तौड़गढ़ के बूंदी रोड स्थित रामद्वारा परिसर में विश्व गौरैया दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पक्षी आवास और परिंडे वितरित करते अतिथि एवं कार्यकर्ता।
चित्तौड़गढ़। संघ की पर्यावरण गतिविधि एवं एकल अभियान द्वारा विश्व गौरैया दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोपाल कृष्ण ने बताया कि वैश्विक स्तर पर गौरैया के महत्व को जानते हुए संपूर्ण विश्व में विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च को मनाया जाता है। जिसके तहत शहर में बूंदी रोड स्थित रामद्वारा परिसर में पर्यावरण संरक्षण गतिविधि एवं एकल अभियान द्वारा संयुक्त रूप से एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें रामस्नेही संप्रदाय के संत दिग्विजय राम, प्रांत पर्यावरण संयोजक धर्मपाल गोयल, प्रांत के सहधार्मिक प्रमुख जितेंद्र त्रिपाठी, मनोज वैष्णव आदि के सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने गौरैया संरक्षण के लिए रामद्वारा परिसर में पक्षी आवास तथा पक्षियों के लिए परिंडे भी लगाए।
भारतीय संस्कृति में जीव सेवा और गौरैया का महत्व
इसके उपरांत दिग्विजय राम द्वारा उपस्थित कार्यकर्ताओं को हमारी संस्कृति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि "भारत की संस्कृति में हमेशा जीव के लिए सेवा भाव रहा है, प्राचीन काल में कच्चे घरों में रहने वाले गोरिया मानव का सबसे पुराना साथी पक्षी है जो की जैव विविधता के लिए अति आवश्यक है तथा हमारी फसलों का रक्षक भी है।" उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपने घरों पर पक्षी आवास तथा पक्षियों के लिए परिंदे बांधने का आग्रह किया।
आधुनिक चुनौतियां और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
प्रांत संयोजक धर्मपाल ने बताया कि अंधाधुन पक्का करण, कीटनाशक दवाइयां का उपयोग गौरैया के प्राकृतिक आवास एवं जीवन के लिए संकट बना हुआ है। उन्होंने सुझाव दिया कि हम सबको घर के वेस्ट से भी पक्षी आवास एवं परिंडे लगाने चाहिए। उन्होंने चीन के माओ का उदाहरण देते हुए बताया कि "सालों पहले चीन ने गोरेया को मरवाया उसके कारण उसका अनाज उत्पादन 50 प्रतिशत रह गया, वैज्ञानिक शोध से पता चला की गौरैया फसल को खराब करने वाले कीटों को खाकर फसल की रक्षा करती है तथा मानव द्वारा पुनः गौरेया के संरक्षण का काम हुआ।"
कार्यकर्ताओं की सहभागिता एवं संसाधन वितरण
इस महत्वपूर्ण बैठक में सतीश सोनी, धीरज सोनी, मनीष जेन, महिपाल सिंह, गोपाल कच्छावा, संजय शर्मा, ओम अजमेरा, शिव डाड, रमेश चाष्टा, नेहा बैरागी, पूजा शर्मा, पूजा सेन, खुशी वैष्णव, काजल सेन, अनीता कंवर आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के उपरांत सभी कार्यकर्ताओं को पक्षी आवास एवं परिंडे उपलब्ध कराए गए ताकि वे इस संरक्षण अभियान को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ा सकें।

Piyush Mundara, Chittorgarh
नाम: पियूष मूंदड़ा
वर्तमान पद: संवाददाता
कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)
अनुभव: साल 2013 से
विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग
बीट और कवरेज
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शैक्षणिक योग्यता
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
