चित्तौड़गढ़: क्या डूंगला बनेगा नगरपालिका? मुख्यमंत्री से उठी बड़ी मांग, अतिक्रमण और गंदगी से त्रस्त जनता को राहत की आस
चित्तौड़गढ़ जिले की डूंगला ग्राम पंचायत को नगरपालिका बनाने की मांग तेज। रोड़ीलाल मेहता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण और साफ-सफाई की समस्याओं से अवगत कराया। जानें कैसे नगरपालिका का दर्जा मिलने से बदलेगी डूंगला की तस्वीर और क्या हैं स्थानीय निवासियों की उम्मीदें।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले का महत्वपूर्ण उपखण्ड मुख्यालय डूंगला अब एक बड़े प्रशासनिक बदलाव की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है। क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने का गौरव रखने वाले डूंगला को अब नगरपालिका का दर्जा दिलाने के लिए जनांदोलन और मांगें तेज हो गई हैं। स्थानीय निवासी रोड़ीलाल मेहता पुत्र श्री भैरूलाल मेहता ने मुख्यमंत्री महोदय राजस्थान सरकार को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर डूंगला की तस्वीर और तकदीर बदलने की पुरजोर वकालत की है। इस मांग ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि स्थानीय राजनीति में भी नए समीकरण बना दिए हैं।
डूंगला ग्राम पंचायत की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो यहाँ की आबादी लगभग 11,220 तक पहुँच चुकी है, जो नगरपालिका गठन के लिए आवश्यक मानदंडों के बेहद करीब है। प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि यदि आवश्यक हो, तो समीपस्थ ग्राम माताखेडा और गरावला को भी इसमें सम्मिलित किया जा सकता है, जिससे एक सुव्यवस्थित शहरी निकाय का ढांचा तैयार हो सके। वर्तमान में उपखण्ड कार्यालय होने के बावजूद, डूंगला बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। पंचायत स्तर पर संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण यहाँ साफ-सफाई की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है और समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।
इस पत्र में एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है, वह है बढ़ता हुआ अतिक्रमण। रोड़ीलाल मेहता ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक दबाव और स्थानीय समीकरणों के चलते वर्तमान पंचायत प्रशासन अतिक्रमण हटाने में असमर्थ सिद्ध हो रहा है। यदि डूंगला को नगरपालिका का दर्जा प्राप्त होता है, तो न केवल प्रशासन को अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई करने हेतु कानूनी शक्ति मिलेगी, बल्कि निकाय की निजी आय में भी भारी वृद्धि होगी। इससे क्षेत्र के विकास के लिए नए द्वार खुलेंगे और बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।
इस मांग की गंभीरता को देखते हुए, पत्र की प्रतिलिपि जिला कलक्टर चित्तौड़गढ़ और उपखण्ड अधिकारी डूंगला को भी प्रेषित की गई है। ग्रामीणों का मानना है कि डूंगला नगरपालिका बनने की सभी तकनीकी और व्यावहारिक शर्तें पूरी करता है। अब देखना यह होगा कि क्या राजस्थान सरकार डूंगला की इस जायज मांग को स्वीकार कर यहाँ की जनता को अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं से मुक्ति दिलाती है। यह निर्णय न केवल डूंगला के शहरीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि चित्तौड़गढ़ जिले के प्रशासनिक मानचित्र पर भी डूंगला की अहमियत को कई गुना बढ़ा देगा।

Pratahkal Bureau
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