चित्तौड़गढ़। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री की प्रेरणा से संचालित 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के अंतर्गत गुरुवार को जिला परिषद सभागार में जिला कलक्टर डॉ. मंजू की अध्यक्षता में एक भव्य, प्रेरणादायी एवं जन-जागरूकता से परिपूर्ण सीएसआर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जल संरक्षण, नदियों के पुनर्जीवन, पर्यावरण संतुलन, हरित विकास एवं भविष्य में संभावित जल संकट से बचाव को लेकर व्यापक स्तर पर मंथन हुआ। कार्यक्रम में जिले की औद्योगिक इकाइयों, सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों, पर्यावरण प्रेमियों, शिक्षाविदों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जल संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने स्पष्ट कहा कि सीएसआर के माध्यम से शहर का सौंदर्यीकरण करना वर्तमान समय की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने औद्योगिक संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों के सहयोग से जिले को स्वच्छ, सुंदर, हरित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने का आह्वान किया। डॉ. मंजू ने 'कर्मभूमि से मातृभूमि' की भावना पर जोर देते हुए कहा कि अपनी जन्मभूमि एवं कर्मभूमि के विकास में सक्रिय योगदान देना प्रत्येक व्यक्ति एवं संस्थान का नैतिक दायित्व है। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए सभी औद्योगिक संस्थानों, निजी प्रतिष्ठानों एवं सरकारी कार्यालयों को प्रभावी जल संचयन व्यवस्थाएं विकसित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भवन एवं संस्थान में ऐसी व्यवस्था हो ताकि भूजल स्तर में सुधार हो और जल संरक्षण स्थायी बन सके।

जिला कलक्टर ने सीएसआर गतिविधियों के जरिए जिला मुख्यालय एवं उपखंड स्तर पर ई-लाइब्रेरी विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा एवं डिजिटल संसाधनों को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों को आगे आना चाहिए। साथ ही, उन्होंने जिले के चारों प्रमुख प्रवेश द्वारों के सौंदर्यीकरण हेतु बड़े औद्योगिक संस्थानों को सहयोग के लिए प्रेरित किया। आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए उन्होंने अधिक से अधिक पौधरोपण का आह्वान किया और कहा कि पर्यावरण संरक्षण के बिना जल संरक्षण अधूरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार के अकाउंट में भामाशाहों और उद्यमियों से मुक्त हस्त से गैप फंडिंग की अपील की।

कार्यशाला में बेगूं के अरविंद भट्ट ने प्राचीन भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं का हवाला देते हुए नदियों को जीवनदायिनी और देवतुल्य बताया। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना एवं सरस्वती जैसी नदियों का संरक्षण हमारी सभ्यता की रक्षा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.2 एवं 2.3 के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की गैप फंडिंग और जल उपयोग अंकेक्षण के माध्यम से जल के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। अति कलक्टर दिनेश चंद्र धाकड़ ने जल के महत्व को समझाते हुए पृथ्वी पर उपलब्ध जल संसाधनों और नदियों पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में ग्रीन ऑफिस इनिशिएटिव, एनर्जी ऑडिट एवं ग्रीन बजट जैसी आधुनिक अवधारणाओं से संस्थानों को अवगत कराया गया। हिंदुस्तान जिंक, बिरला समूह, आदित्य समूह सहित अनेक औद्योगिक इकाइयों ने इस अभियान को समाज का अनिवार्य दायित्व बताया। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के जिला महाप्रबंधक राहुल देव एवं मोहित सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और औद्योगिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अंततः, सभी ने जल संरक्षण के संदेश को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

Pratahkal Newsroom

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