चित्तौड़गढ़: परिसीमन की आग में सुलगते गांव, ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर हुंकार भर दी 'लोकतंत्र की हत्या' की चेतावनी
चित्तौड़गढ़ में पंचायत समिति वार्ड परिसीमन के खिलाफ सज्जनपुरा और रामपुरिया के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लोकतंत्र की हत्या और राजशाही थोपने का आरोप लगाते हुए मतदान बहिष्कार की चेतावनी दी है। जानें इस विवाद की पूरी सच्चाई और क्या हैं ग्रामीणों की प्रमुख मांगें।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में पंचायत समिति वार्डों के नए परिसीमन को लेकर भारी जन आक्रोश फूट पड़ा है। प्रशासन द्वारा खींची गई नई सीमाओं ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है, जिसके चलते गुरुवार को सज्जनपुरा और रामपुरिया गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर जबरदस्त प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने जनभावनाओं को दरकिनार कर 'लोकतंत्र का गला घोंटने' और एक नई तरह की 'राजशाही' स्थापित करने की कोशिश की है। आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर सहित सांसद सीपी जोशी और विधायक चंद्रभान सिंह आक्या को ज्ञापन सौंपकर साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राधेश्याम कुमावत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इस बार के परिसीमन में पूरी पंचायत समिति के भीतर एक भी वार्ड ऐसा नहीं बनाया गया जो तार्किक हो। उनके अनुसार, अलग-अलग पंचायतों के टुकड़े-टुकड़े करके और आंशिक ग्राम पंचायतों को आपस में जोड़कर एक ऐसा ढांचा तैयार किया गया है, जो प्रशासनिक सुगमता के बजाय ग्रामीण एकता को खंडित करता है। विशेष रूप से प्रस्तावित वार्ड संख्या 2 से तुम्बड़िया पंचायत और ओडून्द पंचायत के गांव सज्जनपुरा, रामपुरिया और गाडरियावास को काटकर उन्हें जबरन वार्ड नंबर 3 में ग्राम पंचायत सतपुड़ा और नेतावल महाराज के साथ जोड़ दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भौगोलिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह अनुचित है।
सज्जनपुरा और रामपुरिया के ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें उनके मूल ग्राम पंचायत क्षेत्रों (तुम्बड़िया और ओडून्द) के साथ ही रखा जाए और पूर्व की भांति वार्ड संख्या 2 में ही सम्मिलित किया जाए। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कड़े लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने इस 'गलत' परिसीमन को वापस नहीं लिया, तो आगामी चुनावों में कोई भी ग्रामीण अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदान बहिष्कार से उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति या लोकतांत्रिक क्षति की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
इस बड़े विरोध प्रदर्शन में रतनलाल कुमावत, लक्ष्मीनारायण, भेरूलाल, सोहनलाल, बरदीचंद, शंकरलाल, मिट्ठूदास वैष्णव, हरचंद, छीतर, रामचन्द्र, कैलाश अहीर, राधेश्याम, रामलाल अहीर, पिन्टू वैष्णव, अनिल जाट, लक्ष्मण, सोनू, मुकेश और नन्दलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे। ग्रामीणों की यह एकजुटता और चेतावनी जिले में एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संकट की ओर इशारा कर रही है। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह जनता की आवाज सुनकर इस जटिल परिसीमन विवाद का कोई समाधान निकाल पाएगा या नहीं।

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