चित्तौड़गढ़: गुंजाला ऊंदरी झरने पर अनधिकृत प्रवेश करने वाले 4 युवक डिटेन, जुर्माना लगा
विजयपुर रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध प्रवेश और गैरवानिकी गतिविधियों पर वन विभाग ने की सख्त कार्रवाई, पूर्व में शराब पार्टी करने वालों पर भी लगा था जुर्माना।

तस्वीर में बाएं से दाएं खड़े चार युवक विजयपुर के क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय के बाहर परिसर में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जहां पृष्ठभूमि में वन विभाग की सरकारी गाड़ी भी खड़ी है।
विजयपुर रेंज क्षेत्र के अंतर्गत स्थित गुंजाला ऊंदरी झरने एवं आसपास के आरक्षित वन क्षेत्र में वन विभाग ने अनधिकृत प्रवेश और गैरवानिकी गतिविधियों पर सख्त रोक लगा दी है। प्रतिबंध के बावजूद रविवार को आरक्षित वन क्षेत्र में प्रवेश कर नियमों का उल्लंघन करने वाले चार युवकों को राजस्थान वन अधिनियम, 1953 की धारा 26 के तहत डिटेन किया गया। वन विभाग ने उन पर ₹5000 का जुर्माना लगाया तथा बाद में बंधपत्र एवं जमानत पर रिहा कर दिया।
इससे पूर्व शुक्रवार को भी वन विभाग ने झरने के पास शराब पार्टी करते पाए गए चंदेरिया के कुछ युवकों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ₹4500 का जुर्माना लगाया था। साथ ही उन्हें भविष्य में आरक्षित वन क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने की चेतावनी दी गई थी।
वन विभाग के अनुसार आरक्षित वन क्षेत्र में शराब पीना, आग लगाना, पॉलीथीन अथवा अन्य कचरा फैलाना, शिकार करना, वन्यजीवों के आवास को प्रभावित करना तथा झरनों में स्नान करना जैसी सभी गैरवानिकी गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।
फॉरेस्टर मनोहर सिंह जाट ने बताया कि विजयपुर रेंज के सभी वनखंड आरक्षित वन घोषित हैं। ऊंदरी क्षेत्र में पौधारोपण कार्य प्रस्तावित है। इसके लिए सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया गया है तथा निगरानी के लिए वॉच एंड वार्ड की व्यवस्था की गई है। क्षेत्र की देखरेख हेतु उदय राम जटिया एवं रतनलाल भील को नियुक्त किया गया है।
वन विभाग के अनुसार ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बाहरी लोग अक्सर झरने के पास शराब पार्टियां करने पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय लोगों तथा पशु चराने जाने वालों को परेशानी होती है। बरसात के मौसम में कुछ लोग सुरक्षा दीवार तोड़कर झरने तक पहुंच जाते हैं और शराब पार्टी करते हैं। इसी स्थिति को देखते हुए इस वर्ष सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है।
वन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रवेश वर्जित क्षेत्र में पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आरक्षित वन क्षेत्र में गैरवानिकी गतिविधियां करते पाए जाने पर संबंधित वाहन जब्त किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त 6 माह से 3 वर्ष तक की सजा, ₹1,000 से ₹25,000 तक का जुर्माना तथा वन को हुए नुकसान की भरपाई का प्रावधान है। यांत्रिक वाहनों के मामलों में ₹5 लाख तक जुर्माना और वाहन के राजसातकरण (जब्ती) का भी प्रावधान किया गया है।
विजयपुर रेंजर चंद्रजीत सिंह पवार ने बताया कि वन सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राजस्थान सरकार के वन विभाग एवं उप वन संरक्षक, चित्तौड़गढ़ राहुल झाझड़िया द्वारा रेंज को चार मोटरसाइकिल तथा एक बोलेरो कैंपर वाहन उपलब्ध कराया गया है। जल्द ही चार रिवॉल्वर और एसएलआर राइफलें भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वन सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।
उन्होंने बताया कि राजस्व एवं वन विभाग के नक्शों और अभिलेखों के मिलान का कार्य भी जारी है। साथ ही वन सीमा पर मीनारें स्थापित की जाएंगी, जिससे भविष्य में वन भूमि संबंधी विवादों को रोका जा सकेगा।

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