चित्तौड़गढ़: विहिप की समरसता संगोष्ठी 'संगत और पंगत' में उमड़ा जनसैलाब
विनायक राव देशपांडे ने सामाजिक एकजुटता पर दिया ओजस्वी उद्बोधन, छुआछूत मिटाकर 'हिन्दू हम सब भाई-भाई' के भाव को आत्मसात करने का किया आह्वान।

चित्तौड़गढ़ के इंदिरा प्रियदर्शिनी ऑडिटोरियम में आयोजित समरसता संगोष्ठी के दौरान मंच पर उपस्थित मुख्य वक्ता विनायक राव देशपांडे, विहिप पदाधिकारी और गणमान्य अतिथि।
चित्तौड़गढ़। विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल एवं मातृशक्ति दुर्गावाहिनी के तत्वावधान में इंदिरा प्रियदर्शिनी ऑडिटोरियम में समरसता संगोष्ठी संगत और पंगत कार्यक्रम अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा और प्रतापगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में लोग सम्मिलित हुए। पूरा ऑडिटोरियम भारत माता की जय, जय जय श्री राम और जयकारे वीर बजरंगी के गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा।
शौर्य प्रदर्शन और अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अंजलि सेन के शुभांजलि ग्रुप की बहनों द्वारा शौर्य का प्रतीक खड्ग नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह में जोश भर दिया। विभाग मंत्री विश्वनाथ टांक ने स्वागत भाषण के माध्यम से सभी आगंतुकों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेश्याम अमेरिया द्वारा की गई। दुर्गा वाहिनी विभाग संयोजिका लोपामुद्रा जोशी द्वारा समरसता विषय पर सुमधुर काव्य गीत ने राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना का संचार किया। उसके बाद विहिप चित्तौड़ प्रांत अध्यक्ष प्रताप सिंह नागदा ने अपना उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन अभिनन्दन काबरा और जयेश भटनागर द्वारा किया गया। तत्पश्चात कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विनायक राव देशपांडे का चंद्र शेखर सोनी, मनोज साहू, शिवानी साहू व दीपिका छीपा के नेतृत्व में तलवार, विजय स्तभ का प्रतीक, जौहर की छवि भेंट कर स्वागत किया गया।
विनायक राव देशपांडे का ओजस्वी संबोधन
देशपांडे ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सामाजिक समरसता पर विशेष बल दिया। "जाति, वर्ण और आर्थिक असमानता की बेड़ियों को तोड़कर ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।" उन्होंने कहा कि "सदियों पहले ऐसे जातिगत भेदभाव नहीं थे, यह सब तो हमारी संस्कृति को नष्ट करने के षड़यंत्र के चलते मुगलों द्वारा किया गया है। हम सब एक देश में समरस हो कर रहते थे उसका जीता जागता उदाहरण हमारे यहाँ आयोजित होने वाले कुंभ मेले है, जहाँ बिना किसी जातिगत भेदभाव के एक घाट पर हर कोई स्नान कर सकता है।" उन्होंने आह्वान किया कि छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को जड़ से समाप्त कर हमें हिन्दू हम सब भाई-भाई के भाव को आत्मसात करना चाहिए।
संगत और पंगत का आध्यात्मिक महत्व
संगत और पंगत के महत्व को समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि "जब हम साथ बैठते हैं संगत और साथ भोजन करते हैं पंगत, तब हृदय की दूरियां मिटती हैं और अपनत्व बढ़ता है। सेवा ही धर्म के ध्येय को आत्मसात करते हुए समाज के वंचित और पिछड़े वर्ग को गले लगाना ही सच्ची ईश्वर सेवा है।" उन्होंने सांस्कृतिक एकता पर जोर देते हुए कहा की "हमारी जड़ें एक हैं, हमारे पूर्वज एक हैं, इसलिए समाज में किसी भी आधार पर विभाजन स्वीकार्य नहीं है।" कार्यक्रम में संत विनोद यति महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि धर्म वही है जो जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। अंत में योगेश दशोरा ने समरसता मंत्र का वाचन किया।
विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विहिप जिलाध्यक्ष किशन पिछोलिया ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए सामाजिक समरसता के संदेश को जीवन में उतारने का आग्रह कर आगे भी इसी तरह स्नेह सहयोग और आशीर्वाद की अपेक्षा की। कार्यक्रम में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, अनिल ईनाणी, सुरेश चन्द्र उपाध्याय, लता पाण्डिया, कोशल गौड़, सुंदर कटारिया, युधिष्टिर सिंह, अनिल चतुर्वेदी, मनोज सोनी, मदन त्रिपाठी, मुकेश नाहटा, दिनेश भट्ट, लक्ष्मीनारायण जोशी, संगीता ओझा, प्यार चंद्र सेन, दिलीप बारेगामा, मंजुलता जोशी, चंद्र शेखर सोनी, भरत पालीवाल, पुष्कर पाटीदार, यशपाल सिंह, राधा काबरा, विजय जागेटिया, गोपाल छीपा, सागर व्यास, आशीष वैष्णव, बबलेश शर्मा, दिलीप जोशी, पंकज जीनगर, अशोक चौहान, दीपक वर्मा, विक्रम गवारिया, प्रकाश वैष्णव, सचिन यति, कान सिंह, राकेश खाब्या, अंकित सोनी, लक्ष्यराज, बालू राम मूंदड़ा, प्रेम लड्ढा, महावीर कीर, महावीर भड़कत्या, जय वाघेला, विनोद पटवा, हीरा लाल भोई, अंकुर सिंह, मदन गोस्वामी, प्रवीण गोस्वामी, अमन, राजेश राव, सुमित हेड़ा, शुभम, घनश्याम साहू, अमित मीणा, जय सिंह वाघेला, ममता शर्मा, सपना कीर, पूर्वा साहू, आरुषि पंड्या, श्वेता वैद्य, रिया चौबीसा, आरती प्रजापत, निवेदिता सेन, सलोनी रावल, प्राची डांगी, शानू पाराशर, काजल खटीक, कृष्णा भील, निशि, नव्या, तनिषा सोलंकी, मीनल, खुशी, अर्पिता, आयुषी, जिया, अक्षिता, दिक्षिता, नेहा, देवांश, कुलदीप, देवेंद्र, तनिष, बबलू, ईशान, भव्य, मिशु, गणेश, प्रतीक, जगदीश गंगवाल, कमल गुर्जर, राजन माली, सुशील शर्मा सहित सैंकड़ो की संख्या में लोग शामिल हुए।

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