विद्यार्थियों का भव्य वेदारंभ समारोह संपन्न चित्तौड़गढ़: श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय में गूंजे वेदमंत्र, भव्य 'वेदारंभ' समारोह के साथ विद्यार्थियों ने लिया सेवा का संकल्प
चित्तौड़गढ़ के श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय में बीएससी नर्सिंग और डीएएनएण्डपी के विद्यार्थियों के लिए भव्य 'वेदारंभ' समारोह आयोजित किया गया। विधायक श्रीचंद कृपलानी की उपस्थिति में हुए इस आयोजन में वैदिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर जोर दिया गया। मेधावी छात्रों के सम्मान और सेवा संकल्प के साथ नए शैक्षणिक सत्र की संस्कारपूर्ण शुरुआत हुई।

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की पावन धरा पर स्थित श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के प्रांगण में गुरुवार को आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक शिक्षा का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। अवसर था विश्वविद्यालय में नवप्रवेशित बीएससी नर्सिंग एवं डीएएनएण्डपी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए आयोजित 'वेदारंभ' संस्कार का। पारंपरिक रीति-रिवाजों और भव्यता के साथ संपन्न हुए इस समारोह ने न केवल नवागंतुक विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की शुरुआत की, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कारों और सेवा भाव के पवित्र संकल्प से भी जोड़ दिया।
कार्यक्रम की गरिमामयी शुरुआत विश्वविद्यालय के सभागार में ठाकुर श्री के विधिवत पूजन, ज्ञान की देवी मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री एवं विधायक श्रीचंद कृपलानी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला प्रमुख गब्बरसिंह, भगवती शंकर व्यास एवं अशोक नवलखा ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. महेश दीक्षित एवं चेयरपर्सन कैलाशचंद्र मूंदड़ा ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। समारोह की भूमिका बांधते हुए कुलसचिव मधुसूदन शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक परंपरा और वैदिक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विधायक श्रीचंद कृपलानी ने आयुर्वेद और नर्सिंग शिक्षा को समाज की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि वेदारंभ संस्कार महज एक औपचारिक शुरुआत नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासन और परोपकार से जोड़ने का एक पवित्र अनुष्ठान है। कृपलानी ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय जिस प्रकार वैदिक परंपरा के साथ आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रहा है, वह सराहनीय है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि कल का समाज आप में एक कुशल चिकित्सक और मार्गदर्शक देखेगा, इसलिए अपनी शिक्षा के साथ-साथ अपने चरित्र और नैतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करें।
समारोह के दौरान कुलगुरू प्रो. महेश दीक्षित ने विद्यार्थियों को संस्कार, सेवा और समर्पण के त्रिसूत्र पर चलने का पाथेय दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि वैदिक शिक्षा मनुष्य को संस्कारित कर एक बेहतर समाज के निर्माण में आधारभूत भूमिका निभाती है। कार्यक्रम के समापन सत्र में चेयरपर्सन कैलाशचंद्र मूंदड़ा ने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता के विश्वास पर खरा उतरने और राष्ट्र सेवा को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने अनुशासन को विद्यार्थी जीवन का सबसे अनमोल आभूषण बताया।
इस विशिष्ट आयोजन के दौरान वेदपीठ द्वारा एक पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें विधायक कृपलानी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने मेधावी विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा डॉ. रोहित शर्मा ने प्रस्तुत की, जबकि मंच का कुशल संचालन नटवर भाम्बी द्वारा किया गया। आयोजन के सफल समापन पर डॉ. राहुल प्रसाद सती एवं डॉ. सौरभ जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिकारी, गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक साक्षी बने। यह वेदारंभ समारोह न केवल एक प्रवेश उत्सव था, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल और संस्कारपूर्ण भविष्य की एक सशक्त आधारशिला के रूप में दर्ज हुआ।

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