चित्तौड़गढ़: ऐतिहासिक दुर्ग पर उमड़ा सैलानियों का सैलाब, जाम ने बढ़ाई मुश्किलें, पैदल चढ़ाई को मजबूर हुए पर्यटक
चित्तौड़गढ़ में साल की विदाई और शीतकालीन अवकाश के दौरान ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी। भारी वाहन दबाव से दुर्ग मार्ग पर घंटों जाम रहा, कई सैलानी पैदल चढ़ाई को मजबूर हुए। भीड़ से पर्यटन व्यवसाय को राहत मिली और स्थानीय अर्थव्यवस्था को संबल मिला।

चित्तौड़गढ़। वर्ष के अंतिम दिनों की विदाई और शीतकालीन अवकाश के संयोग ने विश्वविख्यात चित्तौड़गढ़ दुर्ग को अभूतपूर्व पर्यटक भीड़ से सराबोर कर दिया है। बीते एक सप्ताह से दुर्ग की प्राचीरों पर देश-विदेश से आए सैलानियों की चहल-पहल लगातार बनी हुई है, लेकिन शनिवार को स्थिति चरम पर पहुंच गई। इतिहास और स्थापत्य कला के अद्वितीय वैभव को निहारने के लिए हजारों लोग एक साथ दुर्ग पहुंचे, जिससे व्यवस्थाएं दबाव में आ गईं।
भारी भीड़ के कारण दुर्ग मार्ग पर वाहनों का दबाव अत्यधिक बढ़ गया और कई घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही। यातायात पुलिस के जवानों को ठंड और शोर-शराबे के बीच पूरे दिन जाम खुलवाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। हालात इतने विकट रहे कि कई पर्यटक लंबा इंतजार करने के बाद थक-हारकर बिना दुर्ग भ्रमण किए ही लौटने को मजबूर हुए। वहीं, वाहनों की लंबी कतारों और ठहरी रफ्तार को देखते हुए कई उत्साही सैलानियों ने पैदल ही चढ़ाई कर दुर्ग के स्मारकों तक पहुंचना बेहतर समझा।
दुर्ग पहुंचने वाले पर्यटकों में इसके गौरवशाली इतिहास को जानने और स्थापत्य की बारीकियों को समझने की गहरी उत्सुकता देखने को मिली। कुंभा महल, विजय स्तम्भ, मीरा मंदिर और पद्मिनी महल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इसके साथ ही प्रमुख शक्तिपीठ कालिका माता मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं, जहां अनुशासन के साथ दर्शन किए गए। सैलानियों ने न केवल इन ऐतिहासिक स्थलों को करीब से देखा, बल्कि अपने कैमरों और मोबाइल में इन क्षणों को सहेजते भी नजर आए।
जहां एक ओर जाम और अव्यवस्थाओं ने प्रशासन और पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ाईं, वहीं दूसरी ओर इस भारी भीड़ ने पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को बड़ी राहत दी है। होटल व्यवसायियों, गाइडों, ऑटो चालकों और हस्तशिल्प व्यापारियों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। शीतकालीन अवकाश के चलते बाजारों में अच्छी ग्राहकी देखी जा रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय संबल मिला है। कुल मिलाकर, चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर उमड़ा यह सैलानी सैलाब एक ओर व्यवस्थागत चुनौतियों को उजागर करता है, तो दूसरी ओर पर्यटन की ताकत और उसके आर्थिक प्रभाव को भी रेखांकित करता है।
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Pratahkal Bureau
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