चित्तौड़गढ़: सड़कों पर सुरक्षा का 'उजाला', चंदेरिया समेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में 872 ड्राइवरों की आंखों में लौटा विश्वास
चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया समेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में हिंदुस्तान जिंक द्वारा आयोजित 8वें निःशुल्क नेत्र जांच शिविर में 280 ड्राइवरों की जांच की गई और 128 को चश्मे प्रदान किए गए। सड़क सुरक्षा माह के तहत अब तक 872 ड्राइवरों को लाभ मिल चुका है। आलोक रंजन और दिनेश प्रजापत के नेतृत्व में आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्पष्ट दृष्टि के माध्यम से 'जीरो एक्सीडेंट' के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

चित्तौड़गढ़। सड़क की अनंत गहराइयों और रात के सन्नाटे में वाहनों के पहिए थामने वाले सारथियों की सुरक्षा अब हिंदुस्तान जिंक की प्राथमिकता बन चुकी है। चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया समेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में सुरक्षा के प्रति एक बड़ी मिसाल पेश करते हुए चंदेरिया लॉजिस्टिक्स टीम ने 'सड़क सुरक्षा माह' के अंतर्गत आठवें विशाल निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का सफलतापूर्वक समापन किया। यह आयोजन मात्र एक चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि उन हजारों जिंदगियों को सुरक्षित करने की एक मुहिम है जो प्रतिदिन सड़कों पर संघर्ष करते हैं। इस सराहनीय पहल के माध्यम से अब तक कुल 872 ड्राइवरों को लाभान्वित कर हिंदुस्तान जिंक ने औद्योगिक सुरक्षा और सामाजिक सरोकार के नए मानक स्थापित किए हैं।
तीन दिनों तक चले इस विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य ड्राइवरों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना था ताकि मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसी जा सके। शिविर के दौरान आधुनिकतम उपकरणों से कुल 280 ड्राइवरों की आंखों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। जांच की सटीकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परीक्षण के तुरंत बाद 110 ड्राइवरों को मौके पर ही चश्मे वितरित किए गए। वहीं, 18 ड्राइवरों की आंखों की विशेष स्थिति को देखते हुए उनके प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर चश्मे कूरियर के माध्यम से सीधे उनके घर भेजने की व्यवस्था की गई है।
सड़क सुरक्षा के इस महायज्ञ में स्पष्ट दृष्टि को सबसे बुनियादी और अनिवार्य आवश्यकता माना गया है। विजन सुधार की यह प्रक्रिया न केवल ड्राइवरों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य राहगीरों के जीवन को भी सुरक्षा का कवच प्रदान करती है। इस पूरे कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन चंदेरिया समेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के लोकेशन हेड आलोक रंजन, लॉजिस्टिक्स हेड दिनेश प्रजापत, लॉजिस्टिक्स टीम सदस्य अंजलि राठौड़ और सेफ्टी हेड बालचंद पाटीदार के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। लॉजिस्टिक्स और सेफ्टी टीम के इस संयुक्त प्रयास को जमीनी स्तर पर 'उन्नति एनजीओ' ने तकनीकी सहयोग प्रदान कर सफल बनाया।
हिंदुस्तान जिंक की यह इकाई भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। 'शून्य दुर्घटना' के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह शिविर एक मील का पत्थर साबित हुआ है। संस्थान का मानना है कि जब ड्राइवर की नजरें चौकस होंगी, तभी सड़कों पर सुरक्षा का पहरा मजबूत होगा।

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