चित्तौड़गढ़: "आक्रांताओं के डर से शुरू हुई थी बाल विवाह की कुप्रथा, अब बेटियों के सर्वांगीण विकास का समय" – उत्तम स्वामी महाराज
चित्तौड़गढ़ में उत्तम स्वामी महाराज ने बाल विवाह निषेध पोस्टर का विमोचन कर इस कुप्रथा को इतिहास की मजबूरी बताया। जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में संतों और अधिकारियों ने 'बाल विवाह मुक्त भारत' का संकल्प लिया। जानिए कैसे आक्रांताओं के डर से शुरू हुई यह प्रथा आज बेटियों के विकास में बाधक है और इसे खत्म करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है।

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की पावन धरा चित्तौड़गढ़ में भक्ति और समाज सुधार का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ भागवत कथा के आध्यात्मिक मंच से समाज की एक गहरी कुरीति पर कड़ा प्रहार किया गया। प्रख्यात संत उत्तम स्वामी महाराज ने उद्घोष किया कि बाल विवाह भारत की मूल संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं रहा, बल्कि यह विपरीत परिस्थितियों की उपज थी। कथा पांडाल में उमड़े जनसैलाब के बीच बाल विवाह निषेध जागरूकता पोस्टर का विमोचन करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यकाल में अपनी बहन-बेटियों की अस्मिता को विदेशी आक्रांताओं से सुरक्षित रखने के लिए विवशता में यह परंपरा शुरू हुई थी।
महाराज ने वर्तमान परिदृश्य की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आज भारत की परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल चुकी हैं। देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और हर नागरिक का स्वाभिमान अक्षुण्ण है। ऐसे सुरक्षित और सुखद वातावरण में अब बाल विवाह जैसी जड़ जमा चुकी कुरीति को जड़ से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है। उन्होंने आह्वान किया कि बेटियों के लिए आज देश में विकास के अनंत द्वार खुले हैं, और हमें उन अवसरों का लाभ उठाकर उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। संतों और समाज के प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए उन्होंने संकल्प दिलाया कि 'बाल विवाह मुक्त हो हिंदुस्तान' के सपने को साकार करने के लिए हर गांव और पड़ोस में सजगता बरतनी होगी।
प्रशासनिक और सामाजिक सहभागिता के इस विशेष आयोजन में जिला कलेक्टर आलोक रंजन के मार्गनिर्देशन और बाल अधिकारिता विभाग के सहयोग से संचालित 100 दिवसीय अभियान की झलक देखने को मिली। भगवती सेवा एवं शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष राम गोपाल ओझा ने बताया कि इस पोस्टर विमोचन का मुख्य उद्देश्य जन-जन को इस कुप्रथा के विरुद्ध लामबंद करना है। कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक गरिमा और सामाजिक सक्रियता का अद्भुत समन्वय दिखा।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी विभूतियां उपस्थित रहीं, जिनमें सुरेश चन्द्र, गजेन्द्र सिंह, चंद्रशेखर, त्रिलोक चंद्र, बद्री लाल जाट, बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक ओम प्रकाश तोषनीवाल, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा, प्रवीण टांक, शैलेंद्र झंवर, राजेंद्र कुमार गगरानी, विश्वनाथ टांक, दीपक वर्मा, पंकज सेन, देवी सिंह राव, कैलाश गुर्जर, लोकेश सोनी, नवीन काकड़दा, करण जूनवाल और सीमा राजोरा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस अभियान को अपना समर्थन दिया। यह आयोजन न केवल एक जागरूकता कार्यक्रम रहा, बल्कि आधुनिक भारत में बेटियों की गरिमा और उनके अधिकारों को पुनः स्थापित करने का एक सशक्त शंखनाद बनकर उभरा है।

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