चित्तौड़गढ़: कड़ाके की ठंड में रैन बसेरों की गर्माहट और अन्नपूर्णा रसोई का स्वाद परखने आधी रात को सड़कों पर उतरे जिला कलक्टर
चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर आलोक रंजन ने देर रात रैन बसेरों और अन्नपूर्णा रसोई का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। भीषण ठंड में जरूरतमंदों को मिलने वाली सुविधाओं और ₹8 में उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता परखने के साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में आए खिलाड़ियों की रसोई का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों को सख्त निर्देश देकर कलक्टर ने सुनिश्चित किया कि शहर में कोई भी व्यक्ति असुविधा का सामना न करे।

चित्तौड़गढ़। भीषण शीत लहर और गिरते तापमान के बीच जिला प्रशासन अब पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में नजर आ रहा है। राज्य सरकार के संवेदनशील निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने और बेसहारा व जरूरतमंद लोगों को ठिठुरती ठंड से निजात दिलाने के ध्येय से जिला कलक्टर आलोक रंजन ने देर रात्रि शहर का औचक निरीक्षण किया। कलक्टर के इस औचक दौरे ने न केवल प्रशासनिक अमले में हलचल पैदा कर दी, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि आमजन की बुनियादी सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मध्य रात्रि के सन्नाटे में जिला कलक्टर आलोक रंजन सबसे पहले रोडवेज बस स्टैंड स्थित रैन बसेरे पहुंचे। वहां उन्होंने उपलब्ध बिस्तरों, साफ-सफाई और सुरक्षा इंतजामों का बारीकी से जायजा लिया। कलक्टर ने स्वयं वहां ठहरे हुए लोगों से संवाद किया और सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानी। इसके पश्चात उन्होंने वहीं स्थित अन्नपूर्णा रसोई का भी गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए, और इसी क्रम में मात्र 8 रुपए में गरिमापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने नगर परिषद आयुक्त को कड़े लहजे में निर्देश दिए कि रैन बसेरों की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाए ताकि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी राहत मिल सके।
प्रशासनिक सतर्कता का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। जिला कलक्टर ने खेल जगत के मेहमानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए इंदिरा गांधी स्टेडियम का रुख किया। यहां आयोजित हो रही राष्ट्रीय विद्यालय स्तरीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में देश के कोने-कोने से आए खिलाड़ियों के लिए संचालित रसोई का उन्होंने स्वयं निरीक्षण किया। कलक्टर ने वहां मौजूद मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा और जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाहरी राज्यों से आए इन नन्हे खिलाड़ियों को भोजन और आवास संबंधी रत्ती भर भी असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता की जांच की और खिलाड़ियों व छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद कर उनके अनुभवों को साझा किया।
जिला कलक्टर आलोक रंजन का यह औचक निरीक्षण शासन की उस संवेदनशीलता को दर्शाता है, जहां कागजी दावों से इतर धरातल पर सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। आधी रात को किया गया यह दौरा न केवल व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का प्रयास है, बल्कि उन खिलाड़ियों और बेसहारा लोगों के मन में विश्वास जगाने की एक सार्थक पहल भी है जो इस समय चित्तौड़गढ़ की मेहमाननवाजी और सरकारी संरक्षण के साये में हैं।

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