चित्तौड़गढ़। शौर्य और भक्ति की पावन धरा चित्तौड़गढ़ के रतन बाग में उस समय एक अद्भुत संगम देखने को मिला, जब श्रीमद्भागवत कथा के आध्यात्मिक प्रवाह के बीच मेवाड़ के रक्षक महाराणा प्रताप की वीरता की गाथाएं गूंज उठीं। सनातन गौरव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस सात दिवसीय महोत्सव के तृतीय दिवस पर श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा कि पूरा पंडाल 'जय मेवाड़' और 'जय श्री कृष्ण' के उद्घोष से गुंजायमान हो गया। महामंडलेश्वर ब्रह्मचारी उत्तम स्वामी महाराज ने महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए उनके योगदान को सनातन धर्म की रक्षा का आधार स्तंभ बताया।

कथा के भव्य शुभारंभ से पूर्व मंच पर विशेष रूप से स्थापित महाराणा प्रताप की आदमकद प्रतिमा पर महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज एवं उपस्थित विशिष्ट अतिथियों द्वारा माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस भावुक क्षण में वहां उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने भी पुष्प वर्षा कर मेवाड़ के इस अमर सेनानी को अपनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का विधिवत आरंभ महाराज के मुखारबिंद से हनुमान चालीसा के पाठ के साथ हुआ, जिसने वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। महाराज ने अपने उद्बोधन में महाराणा प्रताप की तुलना रामायण के हनुमान जी से करते हुए कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी ने 'राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम' के संकल्प को जिया, ठीक उसी तरह महाराणा प्रताप ने भी जीवनपर्यंत सनातन के शिखर को अक्षुण्ण रखने के लिए विश्राम का त्याग कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आज यदि हमारी माताएं-बहनें सुरक्षित हैं और हम निर्भय होकर धर्म का पालन कर पा रहे हैं, तो यह महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राष्ट्रनायकों के 'सनातनी प्रताप' का ही परिणाम है, अन्यथा विघटनकारी शक्तियां और आतंकवादी सोच देश को अस्थिर करने में कोई कसर नहीं छोड़तीं।

इस गरिमामय आयोजन में जनसेवा और राजनीति के प्रमुख चेहरों के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता रही। विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, वरिष्ठ प्रचारक गजेंद्र सिंह, सुरेशचंद्र, चंद्रशेखर, श्यामबिहारी, मनोज, त्रिलोक, गोविन्द, बद्री लाल जाट, सुशील शर्मा, अमित कुमार, निखिल, भरत जागेटिया, अर्जुन मूंदड़ा, महेश नुवाल, महेश चाष्टा, शंकर काबरा, सत्यनारायण तोषनीवाल, अशोक कलन्त्री, नारायण जागेटिया, ओमप्रकाश पोरवाल, पुष्कर सोमानी, मुकेश सोमानी और कमलेश आमेरिया जैसे गणमान्य जन इस पावन अवसर के साक्षी बने। अतिथियों के स्वागत सत्कार की कड़ी में प्रवीण टांक, शैलेंद्र झंवर, पं राकेश शास्त्री, रवि मेनारिया, राजन माली, राजकुमार तोलंबिया, अशोक पलोड, संजय शर्मा, विनीत तिवारी, भरत मेनारिया, रामप्रसाद बघेरवाल, दीपक वर्मा, पंकज सेन, दीनदयाल भारद्वाज, दिलीप सुथार, सुशीला कंवर, भगवती आचार्य, मीना झंवर, मधु नुवाल, प्रेमलता कुमावत, रेखा सोमानी, मधु सनाढ्य, शकुंतला बाहेती और सीमा शर्मा ने महाराज एवं आगंतुकों को उपरना ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने चित्तौड़गढ़ की जनता को अपनी गौरवशाली विरासत और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा को दोहराने का एक सशक्त मंच प्रदान किया।

Pratahkal Newsroom

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