चित्तौड़गढ़: ककरवा के सरकारी स्कूल में गुरुजनों ने पेश की मानवता की मिसाल, कड़कड़ाती ठंड में नौनिहालों को मिला 'नेकी का ऊन'
चित्तौड़गढ़ के जाजड़ों का खेड़ा विद्यालय में शिक्षकों ने पेश की मानवता की मिसाल! मकर संक्रांति पर प्रधानाध्यापक मधु सालवी और शिक्षकों ने निजी खर्च से 60 बच्चों को स्वेटर और स्टेशनरी बांटी। स्नेह भोज के साथ मनाया उत्सव। गुरुजनों के इस पुनीत कार्य ने क्षेत्र में जीती सबका दिल। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

चित्तौड़गढ़: ककरवा के सरकारी स्कूल में गुरुजनों ने पेश की मानवता की मिसाल, कड़कड़ाती ठंड में नौनिहालों को मिला 'नेकी का ऊन'
ककरवा (चित्तौड़गढ़)। भीषण शीत लहर और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच चित्तौड़गढ़ जिले के ग्राम पंचायत फलासिया से मानवता और सेवा की एक ऐसी सुखद तस्वीर सामने आई है, जिसने शिक्षा के मंदिर की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर, जहां पूरा देश दान-पुण्य के कार्यों में व्यस्त था, वहीं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय 'जाजड़ों का खेड़ा' के शिक्षकों ने अपने व्यक्तिगत त्याग से 60 मासूम चेहरों पर मुस्कान बिखेर कर इस उत्सव को सार्थक बना दिया। यह केवल एक वितरण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा के उस अटूट स्नेह का प्रदर्शन था जो आज के व्यावसायिक युग में विरल होता जा रहा है।
इस पुनीत मुहिम की कमान स्थानीय प्रधानाध्यापक मधु सालवी और उनके समर्पित साथी अध्यापक लेखराज गुर्जर, जितेंद्र खोखर एवं सुरमन सिंह गुर्जर ने संभाली। इन शिक्षकों ने सरकारी बजट या किसी बाहरी चंदे का इंतजार करने के बजाय, अपने निजी कोष से विद्यालय के लगभग 60 विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले स्वेटर वितरित किए। जनवरी की इस ठिठुरन में नया स्वेटर पाकर बच्चों की आंखें खुशी से चमक उठीं। शिक्षकों का यह प्रयास यहीं नहीं रुका; उन्होंने बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को समझते हुए आवश्यक स्टेशनरी सामग्री भी उपलब्ध करवाई, ताकि संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे की कलम न रुके।
दिन को और भी यादगार और उत्सवमय बनाने के लिए विद्यालय परिसर में एक भव्य 'स्नेह भोज' का आयोजन किया गया, जहां सभी विद्यार्थियों ने एक साथ बैठकर भोजन का आनंद लिया। इस अवसर पर उपस्थित अन्य शिक्षकों—गोविंद सिंह राठौड़, सुरेंद्र कुमार जांगिड़, तिलकराज मीणा, सम्पत लोहार, फतेह सिंह, सुमेर सैनी और पप्पू लाल ने इस निस्वार्थ सेवा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उपस्थित प्रबुद्धजनों ने कहा कि समाज में जब शिक्षक स्वयं आगे बढ़कर इस प्रकार की पहल करते हैं, तो वह न केवल बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करते हैं बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणापुंज बन जाते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य की कामना करते हुए शिक्षा की अलख जगाए रखने का संकल्प लिया।

Pratahkal Bureau
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