अशोक नगर के सुधीर सुराना के नेत्रदान से दो लोगों को मिला उजाला
चित्तौड़गढ़ के कुंभानगर निवासी सुधीर कुमार सुराना के आकस्मिक निधन के बाद महावीर इंटरनेशनल संस्था के सहयोग से परिजनों ने मरणोपरांत नेत्रदान कर सामाजिक जिम्मेदारी की अनूठी मिसाल पेश की।

चित्तौड़गढ़ में दिवंगत सुधीर कुमार सुराना के निवास स्थान पर मरणोपरांत नेत्रदान की चिकित्सा प्रक्रिया संपन्न होने के बाद कॉर्निया बॉक्स के साथ खड़े महावीर इंटरनेशनल के सदस्य और शोक संतप्त परिजन।
चित्तौड़गढ़ में मानवता और सेवा की एक प्रेरणादायी मिसाल उस समय देखने को मिली जब अशोक नगर कुंभानगर निवासी सुधीर कुमार सुराना के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिजनों ने मरणोपरांत नेत्रदान का निर्णय लिया। इस निर्णय ने न केवल एक संवेदनशील सामाजिक संदेश दिया, बल्कि दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश भरने का मार्ग भी प्रशस्त किया।
गुरुवार को दिवंगत सुधीर कुमार सुराना के परिजनों की उपस्थिति में यह पुनीत प्रक्रिया संपन्न कराई गई। यह संपूर्ण नेत्रदान प्रक्रिया Mahavir International के तत्वावधान में पूरी की गई, जिसने इस मानवीय कार्य को व्यवस्थित रूप से संपादित करवाया। इस अवसर पर संस्था से जुड़े नवनीत मोदी, प्रकाश पोखरणा, नरेंद्र नाहर, सी. पी. जैन, अभय संजेती, प्रकाश गांग और अनिल पटवारी मौजूद रहे।
नेत्रों के कॉर्निया उत्सर्जन की प्रक्रिया महावीर इंटरनेशनल नेत्र चिकित्सालय के वसीम खान और मनोज वैष्णव द्वारा संपन्न की गई। चिकित्सा प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्राप्त दोनों नेत्रों से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिलने की संभावना बनी, जिससे उनका जीवन अब एक नई दिशा की ओर अग्रसर होगा।
यह पूरी घटना Chittorgarh में मानवता, दान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को एक नई ऊंचाई देती है। सुधीर कुमार सुराना का यह नेत्रदान उनके जीवन के बाद भी समाज के लिए एक अमर प्रेरणा के रूप में याद किया जाएगा, जो यह संदेश देता है कि सच्चा जीवन वही है जो दूसरों के अंधकार को दूर कर सके।

Pratahkal Bureau
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