चित्तौड़गढ़ जिले के अंतिम छोर पर राशमी पंचायत स्थित महज 67 की आबादी और 7 से 10 घरों वाले सोलिया गांव का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय आज शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। गुणवत्ता, अनुशासन और उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण के दम पर यह विद्यालय पूरे क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुका है।

इस विद्यालय की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यहां कुल 105 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जो गांव की कुल आबादी से भी अधिक हैं। इनमें केवल 10 विद्यार्थी सोलिया गांव के हैं, जबकि शेष 95 विद्यार्थी पड़ोसी भीलवाड़ा जिले के आमली एवं आसपास के गांवों से प्रतिदिन पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। यह स्थिति विद्यालय के प्रति अभिभावकों के विश्वास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का जीवंत प्रमाण प्रस्तुत करती है।

सोलिया का यह विद्यालय केवल औपचारिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, अनुशासन और संस्कारों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि आसपास निजी एवं अन्य सरकारी विद्यालय उपलब्ध होने के बावजूद अभिभावक अपने बच्चों को यहां भेजना अधिक पसंद करते हैं। वर्ष 2005 में प्राथमिक विद्यालय के रूप में स्थापित यह संस्थान, बढ़ते नामांकन और बेहतर परिणामों के चलते वर्ष 2013 में उच्च प्राथमिक विद्यालय में क्रमोन्नत हुआ। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों और प्रभावी प्रबंधन के आधार पर इसे उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा भी प्राप्त हुआ।

विद्यालय की सफलता के पीछे कार्यरत शिक्षकों का समर्पण और निरंतर प्रयास प्रमुख भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में 9 शिक्षकों का स्टाफ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सक्रिय है। विद्यालय में प्रतिदिन 85 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति दर्ज होती है, जो विद्यार्थियों की सीखने के प्रति रुचि को दर्शाती है। शैक्षणिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाती हैं। सत्र प्रारंभ होते ही विद्यार्थियों को उनकी सीखने की क्षमता के आधार पर पांच समूहों में विभाजित कर 15 दिनों तक बुनियादी दक्षताओं पर विशेष कार्य किया जाता है, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी अपनी गति से सीख सके।

विद्यालय परिसर हरियाली और स्वच्छ वातावरण से आच्छादित है, जो विद्यार्थियों को सकारात्मक माहौल प्रदान करता है। यहां स्मार्ट टीवी, कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त फर्नीचर तथा खेल सामग्री उपलब्ध है। बच्चों के मनोरंजन और शारीरिक विकास के लिए झूले और फिसलपट्टी जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। विद्यालय को आकर्षक स्वरूप देने के लिए शिक्षकों ने मुख्यमंत्री जन सहभागिता योजना के अंतर्गत 40 हजार रुपए का योगदान दिया, जिसके माध्यम से कुल 98 हजार 750 रुपए की लागत से रंग-रोगन और पेंटिंग कार्य कराया गया।

विद्यालय के विद्यार्थियों ने शिक्षा और प्रतियोगी क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पूर्व छात्र राहुल गवारिया का चयन एमबीबीएस में, हीरालाल गाडरी का अध्यापक प्रथम श्रेणी में तथा दिनेश का चयन राजस्थान पुलिस में हुआ है। खेलकूद के क्षेत्र में भी विद्यालय ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। हाल ही में आयोजित जिला स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में विद्यालय की छात्राओं ने चैम्पियनशिप हासिल की। छात्राएं अनिशा कंवर, टीना सालवी, सोनू, तारा तथा छात्र शंकरलाल सालवी का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है।

विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाध्यापक रमेश चंद्र गवारिया को वर्ष 2023 में राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है, जबकि अन्य शिक्षक भी ब्लॉक स्तर पर सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाते हुए विद्यालय स्टाफ प्रतिमाह 3000 रुपए ‘ज्ञान पोर्टल’ पर दान करता है।

सोलिया का यह विद्यालय इस तथ्य का सशक्त उदाहरण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि शिक्षक समर्पित हों, वातावरण सकारात्मक हो और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता हो, तो छोटे से गांव का विद्यालय भी व्यापक प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

Pratahkal Bureau

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