चित्तौड़गढ़: भदेसर के जवान पहलवान गुर्जर का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
राजपूत रेजिमेंट के जवान का दिल्ली में हृदय गति रुकने से निधन, पैतृक गांव धीरजी का खेड़ा में उमड़ा जनसैलाब, 3 साल की बेटी ने दी पुष्पांजलि।

मेवाड़ की वीर धरा ने देश सेवा की वेदी पर अपना एक और सपूत समर्पित कर दिया है। चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर क्षेत्र अंतर्गत धीरजी का खेड़ा निवासी 29 वर्षीय सेना के जवान पहलवान गुर्जर का गुरुवार को दिल्ली स्थित आर्मी अस्पताल में हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया। शुक्रवार को जब शहीद का पार्थिव देह उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो समूचा क्षेत्र 'पहलवान गुर्जर अमर रहे' और 'भारत माता की जय' के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट की 24वीं बटालियन में तैनात पहलवान गुर्जर वर्तमान में नई दिल्ली में पोस्टिंग पर थे। उनके बड़े भाई रमेश गुर्जर ने बताया कि बुधवार शाम ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद साथी जवानों ने उन्हें तत्काल आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराया, परंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था और गुरुवार सुबह उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
जवान के पार्थिव देह को दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा शुक्रवार सुबह चित्तौड़गढ़ के गंगरार लाया गया, जहां से सेना के विशेष वाहन द्वारा उन्हें पैतृक गांव धीरजी का खेड़ा के लिए रवाना किया गया। इस दौरान होड़ा चौराहे से गांव तक 8 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों युवाओं ने हाथों में तिरंगा थामकर मोटरसाइकिल और वाहनों के काफिले के साथ सेना के ट्रक की अगवानी की। जैसे ही पार्थिव देह घर के आंगन में पहुंची, वहां उपस्थित हर आंख नम हो गई। मां उदी बाई और पत्नी विद्या देवी का विलाप देख माहौल अत्यंत गमगीन हो गया। अंतिम विदाई का सबसे भावुक क्षण तब आया जब पहलवान गुर्जर की 3 साल की मासूम बेटी ने अपने पिता के देह पर पुष्प अर्पित किए। अपनी अबोध बालिका को पिता को विदा करते देख हजारों लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। वहीं वीरांगना विद्या ने रुंधे गले से तिरंगे को अपने सिर से लगाकर पति के बलिदान और राष्ट्र प्रेम के प्रति अपना सर्वोच्च सम्मान प्रकट किया।
शुक्रवार दोपहर गांव की सहकारी समिति के पास स्थित मैदान में जवान को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सेना के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी, जिसके पश्चात पिता रामलाल और बड़े भाई रमेश गुर्जर ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में पूर्ण कीं। पहलवान गुर्जर में बचपन से ही सेना में जाने का अटूट जुनून था। प्राथमिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने भदेसर से 12वीं और चित्तौड़गढ़ से कॉलेज की पढ़ाई की। चेन्नई में पहले प्रयास में असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और झुंझुनू जाकर कठिन परिश्रम किया, जिसके परिणामस्वरूप 20 मार्च 2017 को वह सेना में भर्ती होकर अपना सपना पूरा करने में सफल रहे। पिता रामलाल ने उन्हें याद करते हुए बताया कि पहलवान अत्यंत आज्ञाकारी थे और ड्यूटी से लौटने के बाद प्रतिदिन घर फोन करना नहीं भूलते थे। वे अपनी दिव्यांग बड़ी बहन कंकू के स्वास्थ्य और इलाज को लेकर सदैव चिंतित रहते थे। पिछले 20-25 दिनों से उनकी पत्नी भी उनके साथ दिल्ली में ही प्रवास पर थीं।
इस दुःखद अवसर पर विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने शहीद के पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और परिवार को सांत्वना देते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। विधायक ने कहा कि देश सेवा के लिए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और उनकी बहादुरी पर क्षेत्र को गर्व है। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में जिलाध्यक्ष रतन गाडरी, उपखण्ड अधिकारी रजनी मीणा, पुलिस उपाधीक्षक विनोद लखेरा, वृताधीकारी विनोद मेनारिया, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अशोक रायका, भदेसर मण्डल अध्यक्ष हीरालाल रायका, पूर्व मण्डल अध्यक्ष पवन आचार्य, सुरेश जैन, तेजपाल रेगर, राजेन्द्र सिंह, रमेश बोरीवाल, प्रभु गुर्जर, नारायण गुर्जर, भोपालसिंह, ललीत खटीक सहित भारी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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