चित्तौड़गढ़ में दो अलग-अलग स्थानों पर सांप मिलने से हड़कंप, कैट स्नेक और 5 फीट लंबे कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू
चित्तौड़गढ़ में एक मकान के बाथरूम से दुर्लभ कैट स्नेक और गेहूं चक्की से 5 फीट लंबे कोबरा के मिलने से हड़कंप मच गया। रेस्क्यू टीम ने दोनों सांपों को सुरक्षित पकड़कर प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया, जिससे इलाके में राहत तो आई लेकिन दहशत का माहौल बना रहा।

चित्तौड़गढ़ के लालजी का खेड़ा गांव में शनिवार को गेहूं पीसने की चक्की के पास पहुंचे पांच फीट लंबे जहरीले कोबरा सांप को वन्यजीव संरक्षण समिति के सदस्य ने सुरक्षित रेस्क्यू किया।
चित्तौड़गढ़ में शनिवार को दो अलग-अलग स्थानों पर सांप मिलने की घटनाओं ने लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। एक ओर जहां शहर के प्रताप नगर क्षेत्र स्थित विश्वनाथ कॉलोनी के एक मकान के बाथरूम में दुर्लभ कैट स्नेक दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर लालजी का खेड़ा गांव की एक गेहूं पीसने की चक्की पर करीब 5 फीट लंबा जहरीला भारतीय नाग (कोबरा) पाया गया।
प्रताप नगर क्षेत्र में मकान के बाथरूम में सांप नजर आते ही परिवार के सदस्य भयभीत हो गए और तत्काल इसकी सूचना चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति को दी गई। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान शुरू किया। जांच के दौरान पाया गया कि यह कैट प्रजाति का लगभग ढाई फीट लंबा सांप था, जिसे चित्तौड़गढ़ क्षेत्र के लिए दुर्लभ बताया जा रहा है। टीम ने पूरी सूझबूझ और दक्षता के साथ इस सांप को सुरक्षित पकड़ा और बाद में उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
दूसरी घटना लालजी का खेड़ा गांव की है, जहां गेहूं पीसने की चक्की पर ग्रामीणों ने करीब 5 फीट लंबे भारतीय नाग को देखा। यह स्थान रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही वाला था, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई। स्थानीय लोगों ने सतर्कता बरतते हुए तुरंत वन्यजीव रेस्क्यू टीम को सूचना दी और सुरक्षित दूरी बनाए रखी।
सूचना मिलने पर समिति के सदस्य राहुल वानखेड़े मौके पर पहुंचे और अत्यंत सावधानी के साथ कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान लोगों को सांप से दूरी बनाए रखने और भीड़ न लगाने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अधिकांश सांप बिना कारण मनुष्यों पर हमला नहीं करते, बल्कि खतरा महसूस होने पर ही प्रतिक्रिया देते हैं।
वन्यजीव टीम ने लोगों से अपील की कि सांप दिखने पर उसे मारने के बजाय तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दी जाए। रेस्क्यू के बाद दोनों सांपों को सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वन्यजीवों के साथ संतुलित सह-अस्तित्व और जागरूकता ही मानव और प्रकृति दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

Pratahkal Bureau
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