चित्तौड़गढ़ सेवा शिविर: प्रभारी मंत्री बाघमार ने बांटे आवासीय पट्टे
चित्तौड़गढ़ जिले में आयोजित सेवा शिविरों में प्रभारी मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने पात्र लाभार्थियों को पट्टे सौंपकर सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया।

सुखवाड़ा ग्रामीण सेवा शिविर में प्रभारी मंत्री डॉ. मंजू बाघमार एक लाभार्थी को दस्तावेज प्रदान करते हुए।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राजस्थान में आमजन को सरकारी योजनाओं का लाभ उनके द्वार तक पहुँचाने का संकल्प अब धरातल पर साकार हो रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को चित्तौड़गढ़ जिले में आयोजित ग्रामीण एवं शहरी सेवा शिविरों ने एक नई प्रशासनिक सक्रियता को जन्म दिया। सार्वजनिक निर्माण विभाग की राज्य मंत्री और जिले की प्रभारी डॉ. मंजू बाघमार ने भदेसर उपखण्ड की सुखवाड़ा ग्राम पंचायत और चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में आयोजित इन शिविरों का सघन अवलोकन किया, जहाँ प्रशासनिक अमला आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया।
शिविरों के दौरान प्रभारी मंत्री ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों से विभागीय कार्यप्रणाली की बारीकी से समीक्षा की। इस दौरान प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिचय देते हुए डॉ. बाघमार ने चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के शिविर में 45 पात्र लाभार्थियों को आवासीय पट्टों का वितरण किया। वहीं, सुखवाड़ा के ग्रामीण शिविर में भी 12 लोगों को पट्टे सौंपे गए, जो कई परिवारों के लिए एक बड़े स्वप्न के पूर्ण होने जैसा था। कार्यक्रमों के बीच एक किसान को तारबंदी योजना का प्रमाण पत्र और एक बुजुर्ग लाभार्थी को रोडवेज यात्रा सुविधा का लाभ प्रदान करना इस बात का प्रतीक था कि सरकारी योजनाओं की पहुंच अंतिम छोर तक सुनिश्चित की जा रही है।
प्रभारी मंत्री ने अपने संबोधन में इन शिविरों के मूल उद्देश्य पर बल देते हुए कहा कि आमजन को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना और उनके क्षेत्रों में ही त्वरित समाधान प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविरों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की समस्या को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और पात्र व्यक्तियों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें समयबद्ध तरीके से लाभान्वित किया जाए। मंत्री ने शिविरों के कुशल संचालन के लिए कर्मचारियों की सराहना करते हुए आमजन से इन शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह भी किया।
सुखवाड़ा में केवल प्रशासनिक कार्यों तक ही सीमित न रहकर, इन शिविरों ने मानवीय संवेदनाओं का भी प्रदर्शन किया। वहां आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में गर्भवती महिला की पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गोद भराई की गई, जबकि एक बच्चे का जन्मदिन उत्साहपूर्वक मनाकर सामाजिक सरोकारों का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया गया। यह शिविर न केवल सरकारी योजनाओं के वितरण का केंद्र बने, बल्कि जनभागीदारी और प्रशासनिक संवेदनशीलता के एक मजबूत सेतु के रूप में उभरकर सामने आए, जिसका सीधा लाभ जिले के उन हजारों लोगों को मिल रहा है जो अब तक इन योजनाओं से अछूते थे।

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