चित्तौड़गढ़ में उमड़ा सेवा का सैलाब: 514 से अधिक रोगियों ने पाया नया जीवन, नाहटा परिवार की अनूठी पहल
चित्तौड़गढ़ के दिवाकर भवन में जीवन सेवा ट्रस्ट द्वारा स्व. जीवनलाल नाहटा की 14वीं पुण्यतिथि पर विशाल निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। गीतांजली हॉस्पीटल उदयपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर में 514 से अधिक रोगियों की विशेषज्ञों द्वारा जांच व उपचार किया गया। विधायक चन्द्रभानसिंह आक्या और पूर्व राज्य मंत्री सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

चित्तौड़गढ़। भक्ति और शक्ति की पावन धरा चित्तौड़गढ़ में आज सेवा और संवेदना का एक ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने मानवता की मिसाल पेश कर दी। जीवन सेवा ट्रस्ट द्वारा गीतांजली हॉस्पीटल, उदयपुर के तकनीकी सहयोग से आयोजित एक दिवसीय निःशुल्क परामर्श एवं चिकित्सा शिविर में न केवल रोगों का उपचार हुआ, बल्कि सैकड़ों चेहरों पर मुस्कान भी लौटी। गांधीनगर स्थित दिवाकर भवन में आयोजित इस विशाल शिविर में देखते ही देखते जनसैलाब उमड़ पड़ा और दोपहर तक 514 से अधिक रोगियों ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ उठाया।
इस पुनीत आयोजन का सूत्रपात प्रातः 11 बजे अध्यात्म की रश्मियों के बीच हुआ। जीवन सेवा ट्रस्ट के मुकेश नाहटा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह शिविर स्व. जीवनलाल नाहटा की 14वीं पुण्यतिथि की स्मृति में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ परम पूज्य संत विनोद यति महाराज के सानिध्य में हुआ, जिन्होंने दीप प्रज्जवलित कर और स्व. नाहटा की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर विनोद यति महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि नाहटा परिवार द्वारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने का यह संकल्प एक अत्यंत वंदनीय और सराहनीय कदम है।
राजनीतिक और सामाजिक सरोकारों के दिग्गजों ने भी इस मंच से सेवा की महत्ता को रेखांकित किया। क्षेत्रीय विधायक चन्द्रभानसिंह आक्या ने ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जीवन सेवा ट्रस्ट सदैव मानव सेवा के लिए समर्पित रहा है और इनका यह निरंतर प्रयास समाज के लिए प्रेरणापुंज है। वहीं पूर्व विधायक व पूर्व राज्य मंत्री सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत ने शिविर की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि इस जांच व उपचार शिविर के माध्यम से 514 लोगों का पंजीयन कर उन्हें विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराया गया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
शिविर की रीढ़ रहे गीतांजलि हॉस्पीटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने पूरी तन्मयता से अपनी सेवाएँ दीं। चिकित्सा दल में डॉ. आलोक शर्मा, डॉ. दीपांशी, डॉ. लक्ष्मण कुमार, डॉ. शिवानी, डॉ. डेविट माथवानी, डॉ. रतज मंडिया, डॉ. हिमानी दुआ, डॉ. पीयूष शर्मा, डॉ. सैयद मर्गहूब, डॉ. मयंक कुमार और डॉ. जितेन्द्र शर्मा शामिल थे। इन विशेषज्ञों ने हृदय रोग, मस्तिष्क व स्पाईन रोग, पेट व आंत, लीवर रोग, हड्डी रोग, त्वचा रोग, नाक-कान-गला, शिशु व बाल रोग तथा नेत्र रोग जैसी गंभीर समस्याओं का गहन परीक्षण कर उचित उपचार सुझाया।
श्रद्धांजलि सभा और शिविर के दौरान शहर की तमाम प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पुष्पांजलि अर्पित करने वालों और आयोजन में सहभागी बनने वालों में डॉ. आईएम सेठिया, सुशील शर्मा, सुरेश झंवर, अर्जुन मूंदड़ा, गोविन्द, धर्मपाल गोयल, प्रेम मूंदड़ा, पीएमओ डॉ दिनेश वैष्णव, वन्दना वजीरानी, लता पांडिया, रघु शर्मा, हर्षवर्द्धन सिंह, अनिल सोनी, किशन पिछोलिया, शेखर सोनी, राजकुमार कुमावत, रमेशनाथ योगी, देवीसिंह राव, निलेश बल्दवा, राधेश्याम आमेरिया, रामनरेश डाड, आलोक सिंह, कमल प्रजापत, इन्द्रा सुखवाल, अनिल ईनाणी, प्रमोद गौड़, राकेश जेतलिया, बालमुकुन्द मालीवाल, धर्मेन्द्र मूंदड़ा, मनोज शर्मा, आदित्येन्द्र सेठिया, बलवंत बाघमार, गौरव सोमानी, कमल मेहता, देवराज साहू, विपिन नाहर, राजेश सेठिया सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक, व्यापारिक और एनजीओ संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे।
समापन तक दिवाकर भवन सेवा के केंद्र के रूप में जीवंत रहा। यह शिविर मात्र एक चिकित्सा कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के प्रति उस उत्तरदायित्व का प्रतीक बना, जो स्व. जीवनलाल नाहटा की स्मृति को सेवा के माध्यम से जीवंत रखने का प्रयास करता है। निःशुल्क चिकित्सा और परामर्श के इस महायज्ञ ने चित्तौड़गढ़ के स्वास्थ्य इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

Pratahkal Bureau
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