चित्तौड़गढ़ में सांवलियाजी जा रही बस पलटी, एक श्रद्धालु की मौत और 30 घायल
चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाईवे पर भादसोड़ा के पास चालक को नींद की झपकी आने से अनियंत्रित होकर पलटी बिना परमिट की निजी बस, जिला कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश।

चित्तौड़गढ़-उदयपुर नेशनल हाईवे पर मंगलवार सुबह बागुंड गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई श्रद्धालुओं से भरी निजी बस को क्रेन की मदद से सीधा कर रास्ते से हटाती हुई भादसोड़ा थाना पुलिस।
चित्तौड़गढ़-उदयपुर नेशनल हाईवे पर मंगलवार तड़के एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना में प्रसिद्ध कृष्ण धाम सांवलियाजी दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं से भरी एक निजी बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भीषण हादसे में एक श्रद्धालु की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि करीब तीन दर्जन यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना चित्तौड़गढ़ के भादसोड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बागुंड गांव के पास सुबह करीब 5:30 बजे घटित हुई। टक्कर इतनी भयावह थी कि बस की छत पर सवार लगभग 20 से 25 यात्री सीधे नेशनल हाईवे की पक्की सड़क पर जा गिरे। यह एक बड़ा संयोग रहा कि हादसे के समय पीछे से कोई अन्य तेज रफ्तार वाहन नहीं आ रहा था, अन्यथा सड़क पर गिरे यात्री उसकी चपेट में आ सकते थे और हताहतों का आंकड़ा बेहद खौफनाक हो सकता था।
भादसोड़ा थाना अधिकारी महेंद्र सिंह गुर्जर के अनुसार, एक निजी बस चित्तौड़गढ़ से यात्रियों को लेकर सांवलियाजी मंदिर की ओर जा रही थी। बागुंड के समीप जब बस सर्विस रोड पर संचालित हो रही थी, तभी अचानक चालक को संभवतः नींद की झपकी आ गई, जिससे उसने वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया। अनियंत्रित हुई बस सीधे नेशनल हाईवे की तरफ बढ़ गई, जहां आगे बढ़ने का कोई मार्ग उपलब्ध नहीं था। रफ्तार अत्यधिक तेज होने के कारण बस ने जोरदार टक्कर मारते हुए डिवाइडर, वहां स्थापित बिजली के पोल और लोहे की सुरक्षा रेलिंग को पूरी तरह से उखाड़ दिया और मुख्य हाईवे पर जाकर पलट गई। हादसे के तुरंत बाद घटना स्थल पर चीख-पुकार मच गई। राहगीरों द्वारा दी गई सूचना पर भादसोड़ा थाना पुलिस और चित्तौड़गढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से हाईवे एंबुलेंस तत्काल मौके पर पहुंची।
पुलिस ने स्थानीय नागरिकों की सक्रिय मदद से घायलों को तुरंत क्षतिग्रस्त बस से बाहर निकाला और उन्हें भादसोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व सांवलियाजी मंडफिया चिकित्सालय पहुंचाया। हादसे में गंभीर रूप से घायल लगभग एक दर्जन यात्रियों को प्राथमिक उपचार प्रदान करने के बाद चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया। दुर्घटना में नपनिया (तहसील छबड़ा) निवासी 32 वर्षीय रघुवीर मीणा पुत्र अज्ञात की मौके पर ही दुःखद मृत्यु हो गई। बस में सवार श्रद्धालु जयपुर, जोधपुर, कोटा, सवाई माधोपुर और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों व जिलों से ट्रेनों और बसों के माध्यम से चित्तौड़गढ़ पहुंचे थे और वहां से सांवलियाजी मंदिर में दर्शन करने हेतु इस निजी बस में सवार हुए थे।
हादसे के पश्चात भादसोड़ा पुलिस ने क्रेन की सहायता से दुर्घटनाग्रस्त बस को बीच हाईवे से हटवाया तथा क्षतिग्रस्त बिजली के पोल व सुरक्षा रेलिंग को किनारे करवाकर अवरुद्ध हुए यातायात को सुचारू करवाया। पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने वाले बस ड्राइवर के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी जांच शुरू कर दी है। बस में सवार करीब 30 श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिनमें से 11 को चित्तौड़गढ़ जिला चिकित्सालय और 3 को बेहतर उपचार के लिए उदयपुर रेफर किया गया है, जबकि शेष 4 का प्राथमिक इलाज जारी है। जांच में यह भी सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त हुई यह निजी बस बिना किसी वैध परमिट के यात्रियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही थी। बताया जा रहा है कि परिवहन विभाग की नाक के नीचे यह बस लंबे समय से चित्तौड़गढ़ से सांवलियाजी के बीच अवैध रूप से संचालित थी और इसमें क्षमता से अधिक सवारियां भी बिठाई गई थीं। हादसे की सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार शिवशंकर पारीक भी तुरंत सांवलियाजी मंडफिया उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और भर्ती घायलों के स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी ली।
इस भीषण दुर्घटना में घायल होने वाले यात्रियों में मुख्य रूप से विजय पुत्र गुलाबचंद बुनकर, प्रिंस पुत्र विनोद बुनकर, सुरेंद्र पुत्र गुलाबचंद बुनकर (तीनों निवासी सामोद, चौमूं, जयपुर), सूरज पुत्र राजेंद्र (निवासी कोटा), अर्जुन पुत्र संतोष मीणा, लखन बाग पुत्र राधेश्याम, पवन पुत्र राजू सेन, पवन पुत्र राधेश्याम नागर, जीतू पुत्र कजोड़लाल मीणा (सभी निवासी कोटा), कुबेर सिंह पुत्र मोपत सिंह (निवासी जयपुर), गिरिराज पुत्र मोरपाल (निवासी बामनवास, सवाई माधोपुर), अक्षर पुत्र दीपचंद जाट (निवासी फरीदाबाद), और अमित पुत्र ओमप्रकाश राजपूत (निवासी नगला बांस, मुरसान, हाथरस) सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है।
उदयपुर-चित्तौड़गढ़ सिक्स लेन पर हुए इस भीषण हादसे के बाद जिला कलक्टर डॉ. मंजू तुरंत जिला चिकित्सालय पहुंचीं तथा उन्होंने सभी घायलों की कुशलक्षेम पूछकर उपचार व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया। जिला कलक्टर ने चिकित्सालय में भर्ती घायलों एवं उनके परिजनों से सीधा संवाद कर उनकी शारीरिक स्थिति की जानकारी ली और उपस्थित चिकित्सकों को सभी घायलों का त्वरित, संवेदनशील एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि घायलों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा आवश्यक दवाइयों, विभिन्न जांचों एवं समस्त चिकित्सा सुविधाओं की पूर्ण उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन द्वारा घायलों एवं उनके परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके साथ ही जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का सटीक पता लगाया जा सके और भविष्य में राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जा सके। निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर ने चिकित्सालय परिसर में साफ-सफाई, निर्बाध बिजली आपूर्ति एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने चिकित्सालय परिसर के कचरे में आग नहीं लगाने तथा नगर परिषद के माध्यम से कचरे का नियमित एवं व्यवस्थित निस्तारण सुनिश्चित करने की हिदायत भी दी। उन्होंने दोहराया कि मरीजों एवं उनके तीमारदारों को चिकित्सालय में स्वच्छ, सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दौरान अतिरिक्त जिला कलक्टर दिनेश चंद्र धाकड़, स्थानीय तहसीलदार, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश वैष्णव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ताराचंद गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक एवं चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने चिकित्सालय में उपचार एवं व्यवस्थाओं की सतत मॉनिटरिंग करते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।

Pratahkal Bureau
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