चित्तौड़गढ़। सर्व पितृ अमावस्या पर ऐतिहासिक चित्तौड़ दुर्ग स्थित भीमलत कुंड पर पितृ श्रद्धा और वीर बलिदानियों के प्रति कृतज्ञता का अनूठा संगम देखने को मिला। गौरव तीर्थ प्रन्यास एवं ओम् तत्सत् पारमार्थिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सामूहिक पितृ तर्पण कार्यक्रम में एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के साथ चित्तौड़ दुर्ग की रक्षा, मातृभूमि की स्वतंत्रता और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों को भी तर्पण अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। संत-महात्माओं के सान्निध्य, वैदिक मंत्रोच्चार और 108 कुंडीय हवन से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर रहा।

कार्यक्रम में पूज्य संत अवधूत निरंजन नाथ ने चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ केवल एक ऐतिहासिक दुर्ग नहीं, बल्कि शौर्य, स्वाभिमान, त्याग और मानवीय मूल्यों की जीवंत धरोहर है। यह धरती सनातन संस्कृति की अस्मिता और अदम्य साहस की साक्षी रही है। यहां की माटी का कण-कण त्याग, तपस्या और बलिदान की प्रेरणा देता है। चित्तौड़ की भूमि लोकमंगल की पुण्यधरा है, जिसने पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम, आत्मगौरव और संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया है।

इस अवसर पर संत दिग्विजय राम, विनोद यति, महंत जगन्नाथ भारती और नारायण सिंह सहित अनेक संत-महात्माओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ। गौरव तीर्थ प्रन्यास के अध्यक्ष पुष्कर नराणिया ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ चित्तौड़ दुर्ग की रक्षा, मातृभूमि की स्वतंत्रता और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले वीरों का स्मरण करना भी है। उन्होंने कहा कि चित्तौड़ का इतिहास त्याग, बलिदान और आत्मगौरव की ऐसी अमर गाथा है, जो प्रत्येक पीढ़ी को राष्ट्र और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराती है।

सामूहिक तर्पण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और उन वीर-वीरांगनाओं को भी नमन किया, जिनका जीवन मातृभूमि के सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए समर्पित रहा। आयोजन में सांस्कृतिक एकरूपता और पारंपरिक भारतीय वेशभूषा की विशेष छटा देखने को मिली। पुरुष श्वेत, गेरुआ, लाल एवं केसरिया वस्त्रों में पहुंचे, जबकि महिलाओं ने लाल-पीली ओढ़नी धारण की। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल श्रद्धालुओं से भीमलत कुंड का परिसर भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया।

कार्यक्रम का शुभारंभ यजुर्वेद के मंत्रोच्चार के साथ हुआ। ओम् तत्सत् पारमार्थिक संस्थान के अध्यक्ष, ज्योतिषाचार्य एवं वेदों के ज्ञाता विकास उपाध्याय के नेतृत्व में 21 पंडितों तथा श्री सांवलिया जी वेद विद्यालय के 21 बटुकों ने 108 कुंडीय हवन संपन्न कराया। हवन में सैकड़ों यजमानों ने सपत्नीक भाग लिया और वैदिक मंत्रों के बीच आहुतियां अर्पित कीं। श्रद्धालुओं ने पितरों की आत्मिक शांति और उनके प्रति कृतज्ञता की भावना के साथ चित्तौड़ दुर्ग के अमर बलिदानियों का स्मरण किया। वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान भीमलत कुंड का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण हो गया।

कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भारतीय संस्कृति के सर्वभूत हिताय और जीवमात्र के प्रति करुणा के भाव को भी अभिव्यक्त किया गया। श्रद्धालुओं ने दुर्ग परिसर में विचरण करने वाले बंदरों को कदली फल, गायों को लापसी तथा मछलियों को आटा खिलाकर जीवों के प्रति संवेदना, सह-अस्तित्व और संरक्षण का संदेश दिया।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को ध्यान में रखते हुए पूरे कार्यक्रम को प्लास्टिक मुक्त रखा गया। आयोजन के माध्यम से धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश भी दिया गया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक मयंक, नगर प्रचारक देवांग, बद्रीलाल जाट, श्रवण सिंह राव, राधेश्याम आमेरिया, अमर कंठ उपाध्याय, विहिप पदाधिकारी मुकेश नाहटा तथा पशुपालन विभाग के अधिकारी सुमेर सिंह सहित अनेक गणमान्यजन, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

भीमलत कुंड पर आयोजित सामूहिक तर्पण में वैदिक अनुष्ठानों, संतों के प्रेरणादायी सान्निध्य और जीवमात्र के प्रति करुणा के साथ पूर्वजों एवं चित्तौड़ दुर्ग के अमर बलिदानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस आयोजन ने पितृ श्रद्धा, सांस्कृतिक चेतना, प्रकृति संरक्षण और मातृभूमि के लिए सर्वस्व अर्पित करने वाले वीरों के स्मरण को एक साथ जोड़ा।

Piyush Mundara, Chittorgarh

Piyush Mundara, Chittorgarh

नाम: पियूष मूंदड़ा

वर्तमान पद: संवाददाता

कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

अनुभव: साल 2013 से

विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग

बीट और कवरेज 

  • स्थानीय समाचार: चित्तौड़गढ़ जिला और संबंधित तहसीलों की सभी स्थानीय खबरों की नियमित कवरेज।
  • क्राइम एवं वन्य जीव: पुलिस कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, अपराध संबंधी घटनाओं के साथ-साथ वन्य जीव और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • राजनीति: स्थानीय निकाय, संगठनात्मक गतिविधियां और क्षेत्रीय राजनीतिक घटनाक्रम।
  • प्रशासन: सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक निर्णय, जनसुनवाई और विकास कार्यों की समीक्षा।
  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य: शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियां, विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे, चिकित्सा सेवाएं और स्वास्थ्य योजनाओं का कवरेज।
  • बिज़नेस: स्थानीय बाजार, व्यापारिक गतिविधियां और आर्थिक समाचार।

शैक्षणिक योग्यता

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

Next Story