चित्तौड़गढ़: साँवरिया मारवाड़ी महिला समिति ने बच्चों के लिए लगाया संस्कार शिविर
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कुम्भा नगर में तीन दिवसीय शिविर का आयोजन, विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति की दी गई जानकारी।

चित्तौड़गढ़ के कुम्भा नगर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय संस्कार शिविर के समापन पर विद्यार्थियों के साथ साँवरिया मारवाड़ी महिला समिति की सदस्य और विद्यालय स्टाफ।
वर्तमान समय के संस्कार ही आने वाली पीढ़ी के सुखद भविष्य का आधार हैं, इसी मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए चित्तौड़गढ़ में साँवरिया मारवाड़ी महिला समिति द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। समिति के बाल विकास प्रकल्प के अंतर्गत 'संस्कार वाटिका' अभियान के तहत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुम्भा नगर में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय विशेष संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों में नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करना और उन्हें भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत से अवगत कराना रहा।
शिविर के दौरान आयोजित विभिन्न सत्रों की जानकारी देते हुए आशा पोखरना ने बताया कि विद्यार्थियों को संस्कारों से युक्त मंत्रों के शुद्ध उच्चारण का गहन अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. रेनू सोमानी ने बच्चों को जीवन में संस्कारों के अपरिहार्य महत्व को समझाया तथा उन्हें माता-पिता एवं गुरुओं की निस्वार्थ सेवा के प्रति जागरूक किया। बाल विकास प्रकल्प प्रभारी अर्पणा अरोड़ा ने विद्यार्थियों को विभिन्न कल्याणकारी मंत्रों को कंठस्थ कराने में मुख्य भूमिका निभाई। विद्यालय के संस्कृत अध्यापक पंकज दशोरा ने समिति की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि साँवरिया मारवाड़ी महिला समिति 'संस्कार ही धरोहर' के पवित्र उद्देश्य को समर्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है।
तीन दिनों तक चले इस ज्ञानवर्धक शिविर के समापन अवसर पर बच्चों का उत्साहवर्धन करने के लिए उन्हें बिस्किट के पैकेट वितरित किए गए। पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय स्टाफ का पूर्ण एवं सराहनीय सहयोग रहा। इस संस्कार शिविर में समिति की सदस्य रीना जगेटिया, बबीता विजयवर्गीय, नीलम मरोठिया और रेखा समदानी सहित कई गणमान्य महिलाएं उपस्थित रहीं। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के चारित्रिक विकास में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि समाज में संस्कारों के प्रति एक नई चेतना जागृत करने का कार्य भी करेगा।

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