चित्तौड़गढ़ में सनातन मूल्यों की पुर्नस्थापना: दस दिवसीय संस्कार शिविर का गरिमामयी समापन
चित्तौड़गढ़ के सांवरिया विश्रांति गृह में ऊं तत्सत पारमार्थिक संस्था द्वारा आयोजित दस दिवसीय शिविर संपन्न, बच्चों को गुरुकुल परंपरा और राष्ट्रभक्ति सिखाई गई।

चित्तौड़गढ़ के सांवरिया विश्रांति गृह में आयोजित दस दिवसीय सनातन संस्कार शिविर के समापन समारोह में उपस्थित संत दिग्विजय राम और प्रतिभागी।
चित्तौड़गढ़। संस्कारित जीवन ही मानवता का परम लक्ष्य है और यही वह प्रकाश पुंज है जो व्यक्ति को श्रेष्ठता की ओर अग्रसर करता है। इसी पावन उद्देश्य के साथ चित्तौड़गढ़ के सांवरिया विश्रांति गृह में आयोजित दस दिवसीय 'सनातन संस्कार शिविर' का अत्यंत गरिमामयी वातावरण में समापन हुआ। ऊं तत्सत पारमार्थिक संस्था के तत्वावधान में आयोजित यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र बना, बल्कि भावी पीढ़ी के नैतिक और चारित्रिक उत्थान का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में पधारे रामस्नेही संत दिग्विजय राम ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुषोत्तम मास में जहां भक्त देश भर के तीर्थ स्थलों की यात्रा कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं, वहीं इस शिविर के माध्यम से सनातन धर्म की जड़ों को सींचने का पुनीत कार्य संपन्न हुआ है। उन्होंने संस्था अध्यक्ष विकास उपाध्याय के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जिस प्रकार से संस्था ने गुरुकुल परंपराओं और वैदिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया है, वह अत्यंत प्रेरणादायी और गर्व का विषय है।
कार्यक्रम का शुभारंभ संत दिग्विजय राम द्वारा मां सरस्वती की पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर अमरकण्ठ उपाध्याय, ओमप्रकाश उपाध्याय, मदन मोहन उपाध्याय, डॉ. योगेश व्यास, रमेश चंद्र चाष्टा, बद्रीलाल शर्मा, मधुसूदन शर्मा, पीयूष त्रिपाठी, शशिरंजन तिवारी, संजय मेनारिया, शैलेश मेनारिया, शशिकांत चतुर्वेदी और शिरीष त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने संत का उपर्णा पहनाकर भव्य स्वागत किया।
शिविर के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए पंडित विकास उपाध्याय ने बताया कि इस दस दिवसीय आयोजन का मुख्य लक्ष्य बच्चों और युवाओं को प्रातः जागरण, अनुशासित दिनचर्या, वैदिक शास्त्रीय ज्ञान और गुरुकुल परंपराओं से जोड़ना था। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को सामूहिक एकता, राष्ट्रभक्ति और सदाचार की शिक्षा दी गई, ताकि वे भविष्य में एक धर्मनिष्ठ एवं सत्यनिष्ठ राष्ट्र के नव-निर्माण में अपनी महती भूमिका निभा सकें। पंडित उपाध्याय ने शिविर को सफल बनाने में अपना योगदान देने वाले समस्त विद्वान जनों और भामाशाहों का कृतज्ञतापूर्वक आभार व्यक्त किया।
समारोह के अंतिम चरण में पंडित मदन मोहन उपाध्याय, प्रो. सुशीला लढ्ढा और इंद्रा शर्मा द्वारा शिविरार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर गौरव त्यागी, हर्षवर्धन सिंह, अनिल ईनाणी, भोलाराम प्रजापत, भरत डंग, शैलेन्द्र झंवर, अशोक बसेर, मनोज पारीक, डॉ. सुभाष शर्मा, नंदकिशोर निर्झर और बंशीलाल कांटिया सहित समाज के अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। अंत में शांति पाठ एवं राष्ट्रगान के साथ शिविर का विधिवत समापन हुआ, जो राष्ट्र और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का संदेश दे गया।

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