चित्तौड़गढ़: सचिव सुनील कुमार गोयल ने सखी वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण
चंदेरिया स्थित केंद्र पर विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने व्यवस्थाएं जांची और पीड़िता के बयान व आश्रय संबंधी सुविधाओं की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए।

चित्तौड़गढ़। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों की अनुपालना में शुक्रवार को न्याय और सुरक्षा के साझा सरोकारों की एक महत्वपूर्ण झलक देखने को मिली। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुनील कुमार गोयल ने महिला अधिकारिता विभाग परिसर, चंदेरिया थाने के पीछे संचालित ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान न्यायिक संवेदनशीलता के साथ केंद्र की कार्यप्रणाली और वहां आश्रय ले रही महिलाओं व बालिकाओं की सुरक्षा तथा विधिक सहायता के प्रबंधों की समीक्षा की गई।
निरीक्षण की शुरुआत में सचिव गोयल ने केंद्र के केस रजिस्टर और महत्वपूर्ण दस्तावेजों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया, ताकि व्यवस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इसी क्रम में पैनल अधिवक्ता भारती गहलोत ने आश्रय कक्ष में रह रही एक बालिका के मामले का विशेष संज्ञान लिया, जिससे केंद्र में दी जा रही कानूनी मदद की सक्रियता स्पष्ट हुई। सेंटर की काउंसलर सुमन ने केंद्र की बहुआयामी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह केंद्र हिंसा से पीड़ित किसी भी महिला को बिना किसी जाति, धर्म, वर्ग, क्षेत्र, लैंगिक अभिविन्यास या वैवाहिक स्थिति के भेदभाव के, एक ही छत के नीचे अविलंब आश्रय और सहायता प्रदान करता है।
विशेष रूप से, पीड़ित महिलाओं को 5 दिनों की अवधि तक भर्ती कर उन्हें निःशुल्क भोजन, सुरक्षित आवास और दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पीड़िता की रिपोर्ट और बयान भी संबंधित थाने द्वारा केंद्र परिसर में ही दर्ज किए जाते हैं। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में देश भर में संचालित यह ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ 24 घंटे और 365 दिन क्रियाशील रहता है, जहां पालियों में कुशल परामर्शदाता, सुरक्षाकर्मी और हेल्पर अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। निरीक्षण के अंत में सचिव सुनील कुमार गोयल ने नालसा और रालसा द्वारा जनहित में संचालित विभिन्न विधिक योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी साझा की। इस अवसर पर पैनल अधिवक्ता भारती गहलोत सहित सखी सेंटर के कर्मचारी नीतू जोशी, पायल सेन, मयंक भटनागर, सविता माली और पुलिस कांस्टेबल यशोदा सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। यह निरीक्षण न्याय प्रणाली और प्रशासनिक सुरक्षा तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुआ है।

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